IPv4 Address In hindi? नेटवर्क या इंटरनेट पर जब भी हम किसी वेबसाइट को एक्सेस करते है। वीडियो देखते हैं या ऑनलाइन गेम खेलते हैं, तो हमारे कंप्यूटर या मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए डेटा का आदान-प्रदान करते हैं। नेटवर्क से कनेक्ट होने वाले प्रत्येक डिवाइस को एक खास पहचान दी जाती है जिसे IP एड्रेस (Internet Protocol Address) कहते हैं। यह एक नंबर आधारित यूनिक एड्रेस होता है, जो किसी डिवाइस को इंटरनेट या लोकल नेटवर्क में पहचानने के लिए उपयोग होता है। इस आर्टिकल में हम IPv4 एड्रेस के बारे में विस्तार से जानने वाले है जैसे की IPv4 एड्रेस क्या है? IPv4 के प्रकार, विशेषता, संरचना, फायदे और सीमाएं
Internet Protocol Address क्या है?
इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस (IP Address) एक यूनिक नंबर होता है जिसका उपयोग कंप्यूटर और अन्य डिवाइस को नेटवर्क या इंटरनेट से जोड़ने के लिए किया जाता है। जब आप मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप से इंटरनेट को कनेक्ट करते है तो उस समय आपका डिवाइस एक यूनिक नंबर का इस्तेमाल करता है जिसे कंप्यूटर नेटवर्किंग की दुनिया में IP Address कहते है।
आईपी एड्रेस एक प्रकार का डिजिटल एड्रेस होता है जिस प्रकार आपके घर का एक एड्रेस होता है। IP एड्रेस दो प्रकार के होते हैं: IPv4 और IPv6। IPv4 को सबसे अधिक उपयोग किया जाता है और इसे चार पार्ट में डिवाइड किया गया होता है 192.168.1.1। IPv4 एड्रेस पब्लिक या प्राइवेट हो सकते हैं, और डाटा ट्रांसफर में अहम भूमिका निभाते हैं।

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IPv4 एड्रेस क्या है? | What Is IPv4 Address In Hindi
IPv4 का फुल फॉर्म Internet Protocol Version 4 है। लोकल नेटवर्किंग और इंटरनेट में IPv4 सबसे अधिक और सबसे पुराना IP एड्रेस सिस्टम है। IPv4 एड्रेस 32-बिट का होता, चार भागों में बँटा होता है और हर भाग को डॉट (.) से अलग किया जाता है। उदाहरण के लिए 192.168.0.1 एक IPv4 एड्रेस है। इसमें हर भाग 0 से 255 तक की संख्या हो सकती है।
IPv4 Address का कार्य होता है कंप्यूटर या अन्य नेटवर्किंग डिवाइस को नेटवर्क से कनेक्ट करने के लिए एक यूनिक आईडी देना, जिससे डाटा सही डिवाइस तक पहुँच सके। IPv4 एड्रेस पब्लिक और प्राइवेट दोनों प्रकार के हो सकते हैं। आसान शब्दो में कहें तो, IPv4 Address एक ऐसा डिजिटल एड्रेस होता है जो इंटरनेट पर डिवाइस को पहचानने और उससे कनेक्ट करने में मदद करता है।

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IPv4 एड्रेस की विशेषताएं | Feature Of IPv4 Address In Hindi
- 32-बिट एड्रेस: IPv4 एड्रेस 32-बिट का होता है और चार भागों में बँटा होता है।
- डॉटेड डेसिमल फॉर्मेट: एड्रेस (192.168.0.1) को चार अंकों में डॉट (.) से अलग करके लिखा जाता है
- 4.3 अरब यूनिक एड्रेस: IPv4 में लगभग 4.3 billion यूनिक IP एड्रेस होते है।
- पब्लिक और प्राइवेट IP: IPv4 में पब्लिक और प्राइवेट दो तरह के एड्रेस होते हैं
- क्लास बेस्ड एड्रेसिंग: IPv4 एड्रेस को Class A, B, C, D, और E में बाँटा गया है।
- सबनेटिंग सपोर्ट: बड़े नेटवर्क को छोटे हिस्सों (Subnet) में बाँटने की सुविधा देता है।
- ब्रॉडकास्टिंग सपोर्ट: इससे सभी को एक साथ डाटा शेयर किया जा सकता है।
- NAT सपोर्ट: NAT की मदद से कई डिवाइसेस एक ही पब्लिक IP से कनेक्ट हो सकते है
IPv4 एड्रेस कैसे काम करता है? | How Does IPv4 Address Works In Hindi
जब कोई डिवाइस इंटरनेट या किसी नेटवर्क से कनेक्ट होता है, तो नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर या सिस्टम द्वारा एक यूनिक IPv4 एड्रेस दिया जाता है। यह एड्रेस उस डिवाइस का डिजिटल एड्रेस होता है, जिससे उस डिवाइस को नेटवर्क में आसानी से सर्च और पहचाना जा सके । जब आप किसी वेबसाइट को ओपन करते हैं, तो आपका कंप्यूटर उस वेबसाइट के सर्वर से कनेक्ट होता है।
आपका IPv4 एड्रेस सर्वर को यह बताता है कि डाटा कहाँ भेजना है। उदाहरण के लिए, जब आप गूगल ओपन करते हैं, तो गूगल का सर्वर आपके IPv4 एड्रेस को पहचान कर उसी एड्रेस पर डाटा (जैसे वेबसाइट पेज) भेजता है। यह सब इंटरनेट प्रोटोकॉल के नियमों के अनुसार होता है। IPv4 एड्रेस नेटवर्किंग में डाटा भेजने और डाटा रिसीव करने वाले डिवाइसेस के बीच सही कम्युनिकेशन बनाने का कार्य करता है।

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IPv4 एड्रेस की संरचना | Structure of IPv4 Address In Hindi
IPv4 एड्रेस 32-बिट का होता है , जिसे चार हिस्सों में बाँटा गया है। जिसमे से प्रत्येक हिस्सा 8-बिट का होता है, जिसे हम ऑक्टेट (Octet) कहते हैं। इन चार हिस्सों को डॉट (.) से अलग किया जाता है, इसलिए इसे डॉटेड डेसिमल फॉर्मेट कहा जाता है। हर ऑक्टेट की वैल्यू 0 से 255 के बीच हो सकती है। उदाहरण के लिए 192.168.0.1 एक प्रकार का IPv4 एड्रेस है, जिसमें चार हिस्से हैं: 192, 168, 0 और 1। यह फॉर्मेट इंसानों के लिए पढ़ना और समझना आसान बनाता है। यह एड्रेस डिवाइस को नेटवर्क में एक यूनिक पहचान देता है और डाटा ट्रांसफर में मदद करता है
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IPv4 एड्रेस के प्रकार | Types of IPv4 Addresses In Hindi
पब्लिक IP एड्रेस क्या है?
पब्लिक IP एड्रेस एक यूनिक एड्रेस होता है जिसका उपयोग इंटरनेट को एक्सेस करने के लिए उपयोग किया जाता है। जब कोई डिवाइस कंप्यूटर, मोबाइल या राउटर इंटरनेट से कनेक्ट होता है, तो उसे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) द्वारा एक पब्लिक IP एड्रेस दिया जाता है। इस एड्रेस की मदद से आप दुनिया कोई भी वेबसाइट सर्वर या ऑनलाइन सर्विस को एक्सेस कर सकते है। उदाहरण के लिए, 8.8.8.8 (Google DNS) एक पब्लिक IP एड्रेस है।

प्राइवेट IP एड्रेस क्या है?
प्राइवेट IP एड्रेस का उपयोग किसी लोकल नेटवर्क घर, स्कूल या ऑफिस आदि को कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। प्राइवेट IP को कई अलग-अलग नेटवर्क में दोहराया जा सकता है। 192.168.0.1, 10.0.0.1 आदि प्राइवेट IP एड्रेस के कुछ प्रमुख उदाहरण है।
Private IP Range Examples:
- 10.0.0.0 से 10.255.255.255
- 172.16.0.0 से 172.31.255.255
- 192.168.0.0 से 192.168.255.255
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IPv4 की क्लासेस – Class A, B, C, D, E
IPv4 एड्रेस सही से इस्तेमाल और मैनेज करने के लिए इन्हे पाँच क्लास में बाँटा गया है Class A, B, C, D और E। इन क्लासों का उपयोग नेटवर्क के आकार और उद्देश्य के अनुसार किया जाता है। हर क्लास की शुरुआत एक निश्चित रेंज के IP एड्रेस से होती है।

🔵 Class A: Class A IP एड्रेस का उपयोग बहुत बड़े नेटवर्क जैसे बड़ी कंपनियों या सरकारी संस्थाओं आदि के लिए किया जाता है। इसकी IP रेंज 1.0.0.0 से 126.255.255.255 तक होती है । इसमें पहला भाग (octet) नेटवर्क को दर्शाता है और बाकी तीन भाग होस्ट (डिवाइस) के लिए होते हैं। इसमें लगभग 1 करोड़ से भी ज़्यादा डिवाइसेस को कनेक्ट किया जा सकता है।
🟢 Class B: Class B का उपयोग मध्यम आकार के नेटवर्क जैसे यूनिवर्सिटी, कॉलेज या बड़े ऑफिस के लिए किया जाता है। इसकी रेंज होती है: 128.0.0.0 से 191.255.255.255 तक होती है । इसमें पहले दो पार्ट्स (octet) नेटवर्क के लिए और बाकी दो पार्ट्स होस्ट के लिए होते हैं। इससे लाखों डिवाइसेस को जोड़ा जा सकता है।
🟡 Class C: Class C छोटे नेटवर्क जैसे छोटे ऑफिस, स्कूल या घर के नेटवर्क के लिए होता है। इसकी रेंज होती है: 192.0.0.0 से 223.255.255.255 तक होती है । इसमें पहले तीन भाग नेटवर्क के लिए और आखिरी भाग होस्ट के लिए होता है। इस क्लास के IP एड्रेस का उपयोग अधिकतर लोकल नेटवर्क में किया जाता है।
🟠 4. Class D: Class D एड्रेस को मल्टीकास्टिंग और ब्राडकास्टिंग के लिए प्रयोग किया जाता है, जहाँ एक डाटा कई डिवाइसेस को एक साथ भेजा जाता है। इसकी रेंज होती है: 224.0.0.0 से 239.255.255.255। यह सामान्य डिवाइस के लिए नहीं बल्कि खास नेटवर्किंग कार्यों के लिए उपयोग होता है।
🔴 5. Class E: Class E का उपयोग रिसर्च और एक्सपेरिमेंटल (अनुसंधान और परीक्षण) कार्यों के लिए किया जाता है। इसकी रेंज होती है: 240.0.0.0 से 255.255.255.255 तक होती है । यह एड्रेस आम उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं होता और स्पेशल एक्सपेरिमेंट के लिए रिज़र्व होता है।
| Class | IP Range (First Octet) | Default Subnet Mask | Number of Hosts |
|---|---|---|---|
| A | 1.0.0.0 to 126.255.255.255 | 255.0.0.0 | ~16 million per network |
| B | 128.0.0.0 to 191.255.255.255 | 255.255.0.0 | ~65,000 per network |
| C | 192.0.0.0 to 223.255.255.255 | 255.255.255.0 | 254 hosts per network |
| D | 224.0.0.0 to 239.255.255.255 | Not applicable (Multicast) | Not for individual devices |
| E | 240.0.0.0 to 255.255.255.255 | Reserved | Not used for normal operations |
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IPv4 के फायदे | Advantages of IPv4 Address In Hindi
✅ नेटवर्किंग में सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाला प्रोटोकॉल।
✅ समझना, कॉन्फ़िगर करना और नेटवर्क में इम्प्लीमेंट करनाआसान है
✅ Dotted decimal format समझने में सरल।
✅ Routers और devices में support सबसे ज्यादा उपयोग होता है
✅ एक ही पब्लिक IP से कई डिवाइस कनेक्ट हो सकते हैं
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IPv4 की सीमाएं | Limitations of IPv4 In Hindi
आज के समय में IPv4 एड्रेस सबसे पुराना और सबसे अधिक उपयोग होने वाला नेटवर्क एड्रेस सिस्टम है। आज भी उपयोग में है लेकिन इसके कुछ सीमाएं हैं
- लिमिटेड IP एड्रेस की संख्या : केवल लगभग 4.3 अरब यूनिक IP एड्रेस ही उपलब्ध हैं।
- सिक्योरिटी फीचर्स नहीं: डेटा की सुरक्षा और आइडेंटी वेरिफिकेशन के लिए इनबिल्ट फीचर नहीं है
- नेटवर्क सेटअप जटिल: नेटवर्क को मैन्युअली कॉन्फ़िगर करना पड़ता है।
- NAT पर निर्भरता: एक पब्लिक IP से कई डिवाइसेस को जोड़ने के लिए NAT की जरूरत होती है।
- मोबाइल डिवाइस सपोर्ट सीमित: मोबाइल और वायरलेस नेटवर्किंग में सीमित सपोर्ट।
- कम मल्टीकास्ट सपोर्ट: मल्टीकास्टिंग की सुविधा सीमित है।
- नेटवर्क प्रदर्शन पर असर: NAT टेक्नोलॉजी की वजह से परफॉरमेंस में रुकावट आ सकती है।
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IPv4 में Subnetting क्या है?
सबनेटिंग (Subnetting) एक नेटवर्क टेक्नोलॉजी है जिसका उपयोग बड़े नेटवर्क को छोटे-छोटे सब नेटवर्क (Subnet) में बाँटने के लिए किया जाता है। IPv4 में जब बहुत सारे डिवाइस एक साथ कनेक्ट होते हैं, तो नेटवर्क को मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सबनेटिंग से नेटवर्क को छोटे हिस्सों में बाँट दिया जाता है, जिससे डाटा जल्दी और सही तरीके से पहुँचता है।
इससे नेटवर्क की स्पीड, सिक्योरिटी और मैनेजमेंट बेहतर हो जाता है। हर सबनेट को एक यूनिक सबनेट मास्क (Subnet Mask) दिया जाता है, जो यह तय करता है कि IP एड्रेस का कौन-सा हिस्सा नेटवर्क का है और कौन-सा पार्ट होस्ट (डिवाइस) है । उदाहरण के लिए: 255.255.255.0 एक सामान्य सबनेट मास्क है।
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निष्कर्ष (Conclusion)
IPv4 एक ऐसा नेटवर्क प्रोटोकॉल है जिसने इंटरनेट की नींव रखी और आज भी करोड़ों डिवाइसेज में उपयोग हो रहा है। इसका आसान structure, private-public address system, और class-based format इसे समझने में आसान बनाता है। हालांकि IP एड्रेस की कमी और सुरक्षा की सीमाओं के कारण अब IPv6 की ओर बढ़ना जरूरी हो गया है। फिर भी, IPv4 आज भी नेटवर्किंग की दुनिया का एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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