आपने BIOS और UEFI वर्ड्स के बारे में सुना जरूर होगा , जिनका क्रमशः फुल फॉर्म यूनिफाइड एक्स्टेंसिबल फ़र्मवेयर इंटरफ़ेस और बेसिक इनपुट/आउटपुट सिस्टम है। आज के मॉर्डन कंप्यूटर सिस्टम में ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल करते समय हमसे BIOS और UEFI में से किसी एक को सेलेक्ट करने के लिए कहा जाता है। BIOS के बारे में तो हम जान चुके है लेकिन UEFI Kya hai इसके बारे में हमें सही जानकारी नहीं है। आज के इस आर्टिकल में हम UEFI Kya hai , इसके प्रमुख फीचर आदि के बारे में विस्तार से बताने वाले है।
यूईएफआई क्या है ? UEFI Kya Hai ?
UEFI का फुल फॉर्म Unified Extensible Firmware Interface होता है, यह पहले इस्तेमाल किये जाने वाले BIOS (Basic Input/Output System) का मॉर्डन वर्शन है। UEFI का मुख्य कार्य कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट को इनिशियलाइज़ , boot और Operating System को कण्ट्रोल लेने के लिए तैयार करना होता है। BIOS की तुलना में UEFI कंप्यूटर सिस्टम को कई एडवांस फीचर उपलब्ध कराता है जैसे की नए और लेटेस्ट हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट के साथ बेहतर कम्पेटिबिलिटी , बड़े साइज के कंप्यूटर Storage Device का सपोर्ट और GUID पार्टीशन टेबल (GPT) फॉर्मेट के साथ डिस्क से बूट करने की क्षमता जैसे अनेको फीचर शामिल है।
पहले के समय में BIOS को सिर्फ कीबोर्ड से सेटिंग किया जा सकता है लेकिन यूईएफआई ग्राफिकल यूजर इंटरफेस प्रदान करता है जिससे यूजर कीबोर्ड और माउस दोनों की मदद से Firmware सेटिंग के साथ आसानी से इंटरैक्ट होकर अपने अनुसार सिस्टम की सेटिंग कर सकता है। UEFI का एक अन्य महत्वपूर्ण फीचर Secure Boot है, जो Boot Process के समय सिस्टम को malware और अनधिकृत ऑपरेटिंग सिस्टम से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा, यूईएफआई की मॉड्यूलरिटी और एक्स्टेंसिबिलिटी डेवलपर्स को एक्सटेंशन और ड्राइवर बनाने की विशेष परमिशन देता है, जिससे यह एडवांस हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के लिए बहुत उपयोगी हो गया है।

UEFI के प्रमुख फ़ीचर
अभी तक आपने जाना की UEFI Kya Hai और उम्मीद करते है की इसके बारे में आपको अच्छे से समझ आया होगा। UEFI में पहले इस्तेमाल होने वाले BIOS की तुलना में अनेको एडवांस फीचर किये गए है। नीचे यूईएफआई की कुछ प्रमुख विशेषताओं को समझ सकते हैं

- Graphical User Interface (GUI): UEFI ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस की सुविधा प्रदान करता है। यूजर फ्रेंडली इंटरफ़ेस होने से यूजर माउस की मदद से फर्मवेयर के साथ आसानी से इंटरेक्ट हो सकता है। UEFI की मदद से सिस्टम सेटिंग्स को नेविगेट करना और कॉन्फ़िगर करना बहुत आसान हो गया है , जब की BIOS में फर्मवेयर में किसी प्रकार की सेटिंग के लिए सिर्फ Keyboard का इस्तेमाल किया जा सकता था।
- Secure Boot: यूईएफआई में सिक्योर बूट का फ़ीचर दिया गया है जो फर्मवेयर, ड्राइवर और ऑपरेटिंग सिस्टम के डिजिटल हस्ताक्षरों को वेरीफाई करने के बाद ही बूट प्रोसेस को आगे बढ़ाने की परमिशन देता है। यह सिस्टम को मैलवेयर से बचाने में मदद करता है जो बूट प्रोसेस के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ करने का प्रयास कर सकते हैं।
- Fast Boot: UEFI ऑप्टिमाइज़ बूट प्रोटोकॉल को सपोर्ट करता है जिससे पहले के BIOS की तुलना में सिस्टम बहुत फ़ास्ट तरीके से बूट होता है। इसमें हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट को इनिशियलाइज़ करने की प्रक्रिया बहुत सुव्यवस्थित है ,जिससे ऑपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट होने में लगने वाला समय कम हो जाता है।
- Driver Support: यूईएफआई सिस्टम ड्राइवरों की एक विस्तृत श्रृंखला को सपोर्ट करता है, जिससे फर्मवेयर के लिए मॉर्डन Hardware Component के साथ काम करना बहुत आसान हो जाता है। इसके परिणाम स्वरूप सिस्टम हार्डवेयर के साथ सही तरीके से कम्पेटिबल होकर बेहतर परफॉर्म करता है।
- GPT (GUID Partition Table) Support: UEFI फर्मवेयर GPT पार्टीशन को सपोर्ट करता है जिससे कंप्यूटर में लार्ज साइज के पार्टीशन क्रिएट किया जा सकता है और स्टोरेज डिवाइस का सही उपयोग किया जा सकता है। UEFI को GPT का सपोर्ट होने से सिस्टम को 2.2 टेराबाइट तक के डिस्क साइज के साथ बूट कराया जा सकता है।
- Modularity and Extensibility: यूईएफआई को मॉड्यूलर आर्किटेक्चर के साथ डिज़ाइन किया गया है, जो हार्डवेयर वेंडर और डेवलपर्स को यूईएफआई ड्राइवर, एक्सटेंशन और एप्लिकेशन बनाने की परमिशन देता है जिसमे कोर फर्मवेयर को मॉडिफाई किए बिना जोड़ा जा सकता है। यह आसान तरीके से अपडेट और नई हार्डवेयर को सपोर्ट करने की सुविधा देता है।
- Compatibility Support Module (CSM): यूईएफआई में अक्सर कम्पेटिबिलिटी सपोर्ट मॉड्यूल शामिल होता है जो इसे लिगेसी BIOS-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम और बूटलोडर्स को सपोर्ट करने की परमिशन देता है , जिससे BIOS से यूईएफआई में आसान तरीके से ट्रांजीशन होता है।
- Error Reporting and Diagnostics: UEFI सिस्टम में आने वाले एरर को सही से बताने और डायगनोसिस करने में मदद करता है जिससे सिस्टम बूट प्रोसेस के समय आने वाली प्रॉब्लम को आसानी से ट्रबलशूट किया जा सके
- Network Capabilities: UEFI में प्री-बूट नेटवर्किंग प्रोटोकॉल का सपोर्ट दिया गया है , जिसका उपयोग रिमोट मैनेजमेंट और डायगनोसिस करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। UEFI के इस फीचर की मदद से सिस्टम administator नेटवर्क की मदद से सिस्टम को बूट होने से एक्सेस करके कॉन्फ़िगर कर सकता है।
UEFI की कुछ सीमाएं
अभी तक आपने UEFI के फ़ीचर के बारे में जाना , यदि आप सिस्टम में UEFI फर्मवेयर का इस्तेमाल करना चाहते है तो सबसे पहले आपको इसकी कुछ सीमाओं के बारे में समझना चाहिए। नीचे हमने UEFI की कुछ प्रमुख सीमाओं के बारे में बताया है।
- यूईएफआई ट्रेडिशनल BIOS की तुलना में अधिक काम्प्लेक्स है, जिससे जो यूज़र्स BIOS को कई वर्षो से इस्तेमाल करते आ रहे है उनके लिए इसे समझाना के चैलेंज हो सकता है
- यूईएफआई लिगेसी BIOS-को सपोर्ट करने के बावजूद पुराने हार्डवेयर , ऑपरेटिंग सिस्टम और बूटलोडर के साथ कम्पेटिबिलिटी की समस्या आ सकती है।
- विभिन्न मदर बोर्ड वेंडर UEFI इम्प्लीमेंटेशन को कस्टमाइज करने के बाद , इसकी सेटिंग, फीचर और यूजर इंटरफ़ेस में विविधता ला सकती है। जिससे नए यूजर को इस्तेमाल करने में कन्फ्यूजन हो सकती है।
- यूईएफआई फर्मवेयर अपडेट करना BIOS अपडेट की तुलना में अधिक काम्प्लेक्स और सिस्टम के लिए अधिक रिस्की हो सकता है। यदि फर्मवेयर अपडेट प्रोसेस Interrupt या फ़ैल हो जाती है, तो यह सिस्टम के motherboard के ख़राब होने की सम्भावना रहती है।
- यूईएफआई सिक्योर बूट को सपोर्ट करता है लेकिन इसका नुकसान भी हो सकता है यदि कोई यूजर अल्टेरनेटिव ऑपरेटिंग सिस्टम या मॉडिफाई ड्राइवर जो डिजिटली साइन नहीं हो इनस्टॉल करना चाहे तो सिस्टम बूट नहीं होगा।
UEFI और BIOS में अंतर
UEFI kya hai को विस्तार से समझने के बाद , सिस्टम में किसी के फर्मवेयर को इस्तेमाल करने से पहले ट्रेडिशनल BIOS और UEFI के बीच अंतर को समझना बेहद जरूरी है। नीचे के टेबल में UEFI और BIOS के अंतर को विस्तार से समझ सकते है।
| UEFI | BIOS |
|---|---|
| UEFI का फुल फॉर्म Unified Extensible Firmware Interface | BIOS का फुल फॉर्म Basic Input/Output System |
| इसे 1990 में डेवलप किया गया है | इसे सबसे पहले 1980 में डेवलप किया गया है |
| ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआई) में उपलब्ध है | टेक्स्ट बेस इंटरफ़ेस में उपलब्ध है |
| बूटिंग के लिए GPT और MBR को सपोर्ट करता है | बूटिंग के लिए केवल MBR को सपोर्ट करता है |
| OS की सुरक्षा के लिए Secure Boot को सपोर्ट करता है। | OS की सुरक्षा के लिए बिल्ड इन कोई सपोर्ट नहीं है। |
| ऑप्टिमाइज़ प्रोसेस के कारण फ़ास्ट बूट होता है। | UEFI की तुलना में स्लो बूट होता है। |
| हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के लिए बेहतर कम्पेटिबिलिटी सपोर्ट करता है | कुछ हद तक हार्डवेयर कम्पेटिबिलिटी को सपोर्ट करता है |
| CSM के माध्यम से लीगेसी BIOS को सपोर्ट करता हैं | UEFI को किसी तरह से सपोर्ट नहीं करता |
| फर्मवेयर को अपडेट करना थोड़ा काम्प्लेक्स टास्क हो सकता है। | फर्मवेयर को अपडेट करना बहुत आसान होता है। |
| मदर बोर्ड वेंडर द्वारा कुछ हद तक कस्टमाइज किया जा सकता है। | इसके स्टैण्डर्ड को बहुत कम कस्टमाइज किया जा सकता है। |
सम्बंधित जानकारी
- डिवाइस ड्राइवर क्या है? फ़ीचर, प्रकार और कैसे काम करता है?

- प्रिंटर क्या है? प्रिंटर का इतिहास, प्रिंटर के प्रकार, विशेषताएं और उपयोग



- Computer MCQ in Hindi – कंप्यूटर सामान्य MCQ प्रश्न उत्तर



- Basic Computer Questions in Hindi: इंटरव्यू और एग्ज़ाम के लिए उपयोगी



- कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर कैसे बनें : योग्यता, कोर्स और करियर



- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्या हैं? प्रकार, उपयोग और महत्व





