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Network Bridge क्या है इसके प्रकार और कैसे काम करता है

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नेटवर्किंग के इस टुटोरिअल में आज हम आपको नेटवर्क ब्रिज के बारे में बताने वाले है। वैसे इस डिवाइस का उपयोग आज कल नहीं किया जाता है लेकिन इसकी तकनीक का उपयोग अभी भी नेटवर्किंग डिवाइस में किया जाता है। यदि आप नेटवर्किंग को सही तरीके से समझना चाहते है तो आपको नेटवर्क ब्रिज और अन्य नेटवर्किंग डिवाइस को अच्छे से समझाना चाहिए। इस आर्टिकल में आप जानेंगे की नेटवर्क ब्रिज क्या है (Bridge in Computer Network in Hindi) , इसके कितने प्रकार होते है ,इसके मुख्य कार्य क्या है और यह कैसे कार्य करता है

Network Bridge क्या है What Is Bridge in Computer Network in Hindi

ब्रिज एक नेटवर्किंग डिवाइस या सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो दो या दो से अधिक नेटवर्क सेगमेंट  को आपस में जोड़ने का कार्य करता  है जिससे वो आपस में कम्यूनिकेट कर सके।  Bridge OSI Model के data Link  Layer पर कार्य करता है इसका उपयोग मुख्य रूप से एक से अधिक  LAN को एक साथ जोड़कर Local Area Network (LAN) को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

नेटवर्क ब्रिज डाटा को  एक सेगमेंट के  नेटवर्क ट्रैफिक से  रिसीव  करता है और लॉजिकल सिंगल नेटवर्क क्रिएट करते  हुए दूसरे सेगमेंट में फॉरवर्ड करने का कार्य करता  है। Bridge के पास आने वाले प्रत्येक डाटा पैकेट के डेस्टिनेशन  MAC  (Media Access Control Address) एड्रेस को चेक करता और उसी के अनुसार  सुनिश्चित  करता है कि इसे दूसरे सेगमेंट में फॉरवर्ड  करना है या मैक एड्रेस टेबल के आधार पर इसे डिस्कार्ड करना है।

Bridge  नेटवर्क स्विच की तरह होते है जो OSI मॉडल के डाटा लिंक लेयर पर कार्य करते है लेकिन स्विच में ब्रिज की तुलना में अधिक पोर्ट और MAC टेबल को डायनामिक अपडेट  करने और नेटवर्क को सही तरीके से कार्य करने के लिए  अन्य फीचर दिए होते है जब की ब्रिज में केवल 2 पोर्ट होते है और इसमें MAC एड्रेस को मैन्युअल कॉन्फ़िगर करने की जरुरत पड़ती है।

Network Bridge कहा उपयोग किया जाता है 

ब्रिज का इस्तेमाल उस जगह या नेटवर्क स्ट्रक्चर में किया जाता है जहा पर कम खर्च में  LAN नेटवर्क को  एक्सपैंड करके उपयोग किया जाना होता  है।  इसका उपयोग किसी संस्थान के दो अलग अलग बिल्डिंग , फ्लोर , या एरिया  को  LAN से कनेक्ट करने के लिए किया जा सकता है। Bridge अलग-अलग LAN को जोड़कर, नेटवर्क कंजेशन को कम करने में मदद करता है और विभिन्न सेगमेंट में डिवाइस को सीधे नेटवर्क से कनेक्ट करके कम्युनिकेशन और परफॉरमेंस को बढ़ाने में भी  मदद करता है।

नेटवर्क ब्रिज के प्रकार Types Of Network Bridge

अभी तक आपने जाना की नेटवर्क ब्रिज क्या होता है (Bridge in Computer Network in Hindi) उम्मीद करते है की नेटवर्क डिवाइस  Bridgeके बारे में  आपको अच्छी जानकारी मिली होगी । नेटवर्क में विभिन्न प्रकार के नेटवर्किंग ब्रिज को किसी स्पेसिफिक कार्य को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।  नीचे आप कुछ नेटवर्क ब्रिज के बारे  में जान सकते है।

Types Of Network Bridge

Transparent Bridge

  यह एक सामान्य  का नेटवर्क ब्रिज होता है जो OSI मॉडल के डाटा लिंक लेयर पर कार्य करता है।  यह केवल MAC Address के आधार पर  दो नेटवर्क Segment में Ethernet Frame को फॉरवर्ड करने का कार्य करता है। ट्रांसपेरेंट ब्रिज अधिकतर  दो LAN को एक साथ जोड़ने के लिए उपयोग किया जाता  हैं और आमतौर पर ईथरनेट स्विच में पाया जाता है।

Source Route Bridge

सोर्स रूट ब्रिज एक ऐसा ब्रिज है जिसमे source routing तकनीक का इस्तेमाल  किया जाता है।  इस तरह के ब्रिज में  एक सोर्स  Route  को विभिन्न  सेगमेंट में ले जाने का कार्य किया जाता है।  इस तकनीक में डाटा फ्रेम को डेस्टिनेशन तक फॉरवर्ड करने के लिए MAC Address पर अधिक  ट्रस्ट न करते हुए सोर्स डिवाइस द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली इनफार्मेशन पर अधिक ट्रस्ट किया जाता है।

Translation Bridge

ट्रांसलेशन ब्रिज को प्रोटोकॉल ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है।  इस तरह का  ब्रिज  दो अलग-अलग प्रकार के नेटवर्क प्रोटोकॉल को जोड़ने का कार्य करता , जिससे उनके बीच सही तरीके से  कम्युनिकेशन किया जा सके। यह नेटवर्क पैकेट्स को एक प्रोटोकॉल से दूसरे में ट्रांसलेट कर सकता है। विभिन्न Protocol का उपयोग करने वाले डिवाइस  के साथ आसानी से कम्यूनिकेट करने का कार्य करता है।

Learning Bridge

लर्निंग ब्रिज, जिसे सेल्फ-लर्निंग ब्रिज भी कहा जाता है। यह एक ऐसा ब्रिज है जो अपने नेटवर्क सेगमेंट से जुड़े डिवाइस  के मैक एड्रेस को डायनामिक  रूप से लर्न करने का कार्य करता  है। इस तरह का ब्रिज segment से कनेक्ट प्रत्येक डिवाइस के MAC एड्रेस को लर्न करता है और  MAC एड्रेस टेबल बनाता  है और सोर्स से आने वाले प्रत्येक पैकेट के लिए सही डेस्टिनेशन सेगमेंट निर्धारित करने में  इसका उपयोग करता है। डिवाइस के नेटवर्क छोडने और जुड़ने पर लर्निंग ब्रिज MAC टेबल को स्वयं और आटोमेटिक अपडेट भी करता है।

Wireless Bridge

वायरलेस ब्रिज जिसे  वायरलेस ईथरनेट ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार के नेटवर्क ब्रिज डिवाइस का उपयोग विशेष रूप से वायरलेस नेटवर्क के लिए डिज़ाइन किया गया।  यह दो या दो से अधिक वायरलेस नेटवर्क सेगमेंट को आपस में जोड़ने का कार्य करता है  जिससे वह आपस में सही तरीके से कम्यूनिकेट कर सके। वायरलेस ब्रिज का उपयोग आमतौर पर वायरलेस नेटवर्क को एक्सटेंड  करने या फिर रिमोट सेगमेंट को जोड़ने के लिए किया जाता है जहा पर फिजिकल नेटवर्क करना थोड़ा कठिन  होता है।

Virtual Bridge

वर्चुअल ब्रिज, जैसा कि नाम से पता चलता है की यह एक डिवाइस न होकर एक सॉफ्टवेयर-आधारित ब्रिज है जो  कंप्यूटर  या सर्वर   ऑपरेटिंग सिस्टम के अंदर प्रोग्राम  किया जाता है । इस तरह के ब्रिज  वर्चुअल नेटवर्क इंटरफेस (VLAN )या वर्चुअल मशीन (VM )को कनेक्ट करने का कार्य करते  है, जिससे वर्चुअल मशीन फिजिकल मशीन से कनेक्ट हो सके। वर्चुअल ब्रिज का अधिकतर इस्तेमाल virtualization में  क्रिएट किये जाने वाले विभिन्न virtual Machine (VM ) और फिजिकल  नेटवर्क के बीच नेटवर्क कनेक्टिविटी बनाने  के लिए उपयोग किया जाता है।

नेटवर्क ब्रिज के कार्य function of network bridge

function of network bridge
  • Segmentation:  Network Bridge  एक बड़े LAN नेटवर्क को छोटे Segment में  बांटने में मदद करता है जिससे इसे मैनेज करना आसान हो जाता है। एक बड़े नेटवर्क को छोटे Segment  में विभाजित करके, ब्रिज नेटवर्क में कंजेशन को कम करने  और बैंडविड्थ उपयोग   को ऑप्टिमाइज़ करने और नेटवर्क परफॉरमेंस को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  •  Forwarding: ब्रिज का सबसे प्राइमरी फंक्शन  होता है की नेटवर्क ट्रैफिक को अन्य सेगमेंट में फॉरवर्ड करना। जब  ब्रिज एक सेगमेंट से  डेटा पैकेट प्राप्त करता है, तो यह पैकेट के डेस्टिनेशन  मैक एड्रेस को चेक  करता है और इसे मैक एड्रेस टेबल के आधार पर उचित सेगमेंट में फॉरवर्ड  करता है।
  • Filtering Traffic:  ब्रिज MAC एड्रेस के अनुसार नेटवर्क ट्रैफिक को फ़िल्टर करने का कार्य भी करता है इसी के अनुसार ब्रिज डाटा पैकेट को फॉरवर्ड और ब्लॉक करता है।  Bridge  के इस फीचर से नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और अनऑर्थोरिज़ एक्सेस से रोका जा सकता है।
  • Learning:  लर्निंग ब्रिज MAC एड्रेस टेबल को आटोमेटिक अपडेट करने की क्षमता रखता है   जिससे नेटवर्क सेगमेंट में  डिवाइस के ऐड होने  और रिमूव होने ब्रिज MAC एड्रेस टेबल  को आटोमेटिक अपडेट कर लेता  है। ब्रिज  सोर्स से आने वाले नेटवर्क पैकेट को मॉनिटर करने  और नेटवर्क सेगमेंट के साथ एसोसिएट करने के लिए Database का निर्माण करता है
  • Collision Prevention: ईथरनेट नेटवर्क में, Collision तब होता  है जब कई डिवाइस एक ही नेटवर्क सेगमेंट पर एक साथ डेटा ट्रांसमिट  करने का प्रयास करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप डेटा लॉस  और नेटवर्क का परफॉरमेंस डाउन होता  है। ब्रिज प्रत्येक नेटवर्क Segment  के लिए अलग-अलग Collision Domains बनाकर  कॉलिजन  को रोकने में मदद करता  हैं। ब्रिज नेटवर्क को छोटे छोटे सेगमेंट में बांटने  से नेटवर्क रिसोर्स को इस्तेमाल करने और नेटवर्क ट्रैफिक को मैनेज करने Collisions और नेटवर्क को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • Protocol Conversion: कुछ प्रकार के Bridge  जैसे की Translation Bridge  या Protocol Bridges प्रोटोकॉल को कन्वर्शन करने की क्षमता रखते है। वे विभिन्न प्रोटोकॉल का उपयोग करने वाले डिवाइस  के बीच कम्युनिकेशन  करने के लिए एक प्रोटोकॉल से दूसरे  प्रोटोकॉल में ट्रांसलेट करते है जिससे कम्युनिकेशन को आसान बनाया जा सके। नेटवर्क स्विच का सेट अप कैसे  करें

नेटवर्क ब्रिज काम कैसे करता है ? How Network Bridge Works

यदि हम ब्रिज के कार्य को समझे तो इसका कार्य ब्रिज के टाइप्स और नेटवर्क स्ट्रक्चर पर निर्भर करता है। नेटवर्क Bridge में मुख्यतः दो इंटरफ़ेस होते है जिसमे से एक इंटरफ़ेस से नेटवर्क ट्रैफिक को रिसीव करता है। ब्रिज सेगमेंट से कनेक्ट होने वाले सभी डिवाइस के MAC एड्रेस को कलेक्ट करके  MAC एड्रेस टेबल बनाता है। नेटवर्क ट्रैफिक को रिसीव करने के बाद वह इसी टेबल से  डेस्टिनेशन Segment और इंटरफ़ेस का पता लगा कर डाटा पैकेट को सही Segment और इंटरफ़ेस में  फॉरवर्ड करता है।  ब्रिज डिवाइस मुख्य रूप से  कई LAN को एक साथ जोड़कर LAN नेटवर्क को extend  करता है और विभिन्न segment के डिवाइस को  एक दूसरे के साथ कम्यूनिकेट करने  का कार्य करता है।

How Network Bridge Works

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, एक नेटवर्क ब्रिज के मुख्य कार्य ब्रिज  के प्रकार और क्षमताओं के आधार पर सेगमेंट, फॉरवर्ड, फ़िल्टर, लर्निंग , Collision को रोकने , नेटवर्क को एक्सटेंड करने  और प्रोटोकॉल को कन्वर्शन करने जैसे फीचर शामिल रहते  है। उम्मीद करते है की Bridge in Computer Network in Hindi आर्टिकल पसंद आया होगा। किसी तरह के सवाल और फीडबैक के लिए कमेंट करें।

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siya

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