आप आर्टिकल का टाइटल देख कर समझ गए होंगे जी इस आर्टिकल में हम अन्य आर्टिकल के जैसे विस्तार से जानेगे की बायोस क्या है (BIOS Kya Hai ) यदि आप कंप्यूटर के बारे में थोड़ी भी जानकारी रखते है ,कंप्यूटर या टेक्निकल विषय में जानकारी हासिल कर रहे है या कंप्यूटर को सीखने में रूचि रखते है तो आपने बायोस के बारे में जरूर सुना होगा आप में से कुछ लोगो ने बायोस के सेटअप को देखा होगा और सेटिंग भी किया होगा
लेकिन क्या आपको बायोस के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी है जैसे की बायोस क्या है(BIOS Kya Hai ) , कैसे कार्य करता है(Working OF BIOS) , कितने प्रकार की होती है (Types Of BIOS) , बायोस का इसका इतिहास (History Of BIOS ), सबसे पहला बायोस किस कंपनी ने और कब डेवेलोप किया गया था , BIOS और UEFI में क्या अंतर है , आज की एडवांस बायोस कौन से नए फीचर दिए गए है और बायोस के द्वारा सिस्टम में किस तरह की सेटिंग कर सकते है ।
इन सभी सवालों के उत्तर को सरल और आसान भाषा में जानने के लिए हमारे इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद हम आपको विश्वास दिलाते है की आपके पास बायोस से सम्बंधित सभी प्रकार की प्राप्त कर सकेंगे जिससे आप किसी भी तरह के टेक्निकल एग्जाम और इंटरव्यू में आसानी से उत्तर देने में सक्षम हो सकते है।
बायोस क्या है BIOS Kya Hai

BIOS कंप्यूटर के मदर बॉर्ड में लगी एक प्रकार की चिप होती है BIOS का पूरा नाम बेसिक इनपुट आउट आउट सिस्टम (basic input/output system) होता है। BIOS एक प्रोग्राम है जिसे कंप्यूटर का माइक्रोप्रोसेसर को स्टार्ट करने के लिए उपयोग करता है। यह कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) और अटैच्ड डिवाइस जैसे की हार्ड डिस्क, वीडियो एडेप्टर, कीबोर्ड, माउस और प्रिंटर के बीच कम्युनिकेशन कराने का कार्य करता है।
बायोस का इतिहास History Of BIOS
अभी हमने जाना की बायोस क्या है (BIOS Kya Hai) अब आपको कंप्यूटर के बायोस प्रोग्राम के बारे में थोड़ी प्राप्त हुए होगी बायोस के सर्विस और फीचर को जानने से पहले इसके इतिहास के बारे में जानना बहुत जरुरी है । BIOS शब्द का सबसे पहले उपयोग 1975 में अमेरिका के कंप्यूटर वैज्ञानिक गैरी किल्डल द्वारा किया गया था इसे 1981 में सबसे पहले IBM के पर्सनल कंप्यूटर में उपयोग किया गया था और बाद में अन्य कंप्यूटर में इस्तेमाल किया गया था।
पहले के समय में कंप्यूटर की प्रत्येक प्रतिक्रिया जैसे की सिस्टम को स्टार्ट और शटडाउन करने के लिए इसका उपयोग उपयोग किया जाता था यह एक प्रकार से कंप्यूटर बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हुवा करता था । लेकिन आज के समय में इसकी लोकप्रियता कम हो गयी है आज के नयी टेक्नोलॉजी के सिस्टम में यूईएफआई (UEFI) का उपयोग अधिक होने लगा है ।
UEFI का पूरा नाम यूनिफाइड एक्स्टेंसिबल फर्मवेयर इंटरफेस (Unified Extensible Firmware Interface ) है। इंटेल जो दुनिया की सबसे बड़ी माइक्रोप्रोसेसर कंपनी है उसने 2017 में Legacy BIOS को 2020 तक समाप्त करने की योजना की घोषणा किया था। Legacy BIOS को भविष्य में UEFI में बदल दिया जा सकता है ।
कंप्यूटर में बायोस का उपयोग Use Of BIOS In Computer
BIOS का मुख्य कार्य कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम और सिस्टम से कनेक्टेड सभी हार्डवेयर डिवाइस के बीच बिचौलिए के रूप में कार्य करता है मतलब की OS और हार्ड वेयर के बीच इंटरमीडिएट की तरह कार्य करता है और दोनों के बीच कम्युनिकेशन कराने का कार्य करता है। बायोस हमेशा माइक्रोप्रोसेसर और I/O डिवाइस को कण्ट्रोल और डाटा फ्लो को नियंत्रित करता है। BIOS डायरेक्ट मेमोरी में डेटा ट्रांसमिशन कर सकता है जैसे कि वीडियो कार्ड, जिसके लिए फ़ास्ट डेटा ट्रांसमिशन की आवश्यकता होती है।
बायोस कैसे कार्य करता है How BIOS Works
BIOS एक फर्मवेयर चिप होती है जो कंप्यूटर के मदर बोर्ड में फिक्स रहती है। इसका उपयोग कंप्यूटर के OS जैसे की विंडोज , लिनक्स और हार्डवेयर से कम्युनिकेशन कराने का कार्य करता है। BIOS चिप मदर बोर्ड बनाने वाली कंपनी द्वारा पहले से ही इनस्टॉल किया जाता या फिर इसे यूजर द्वारा इनस्टॉल और अपडेट किया जा सकता है।
BIOS एक प्रकार का प्रोग्राम है जिसे माइक्रोप्रोसेसर के लिए इरेज़ेबल प्रोग्रामेबल रीड-ओनली मेमोरी (EPROM) चिप से एक्सेस किया जा सकता है। यूजर सबसे पहले कंप्यूटर को स्टार्ट करता है तो सिस्टम में BIOS Program सबसे पहले स्टार्ट होता है उसके बाद बायोस सिस्टम से कनेक्ट डिवाइस को चेक और स्टार्ट करता है।
BIOS कंप्यूटर को बूट करने से पहले यह निश्चित करता है कि सभी आवश्यक डिवाइस सही तरह से कनेक्ट है और वर्किंग कंडीशन में होने चाहिए । कंप्यूटर से Connected प्रत्येक डिवाइस जो डाटा प्रोसेसिंग , डाटा ट्रांसमिशन और डाटा स्टोर करने के लिए आवश्यक होते है बूट डिवाइस कहलाते है। बायोस सिस्टम से कनेक्टेड सभी डिवाइस की स्थित को चेक करने के लिए एक प्रोग्राम एक्सेक्यूट करता है जिसे POST कहते है बायोस द्वारा पोस्ट प्रोग्राम सफलता पूर्वक रन होने के बाद सिस्टम द्वारा एक टिक साउंड दिया जाता है उसके बाद मदर बोर्ड , बायोस निर्माता कंपनी का नाम स्क्रीन में डिस्प्ले होता है।
यह इस बात का संकेत देता है की बूट के लिए आवश्यक डिवाइस कनेक्ट और वर्किंग स्थित में है और सिस्टम में पोस्ट प्रोग्राम सफलता पूर्वक रन हो चूका है। पोस्ट प्रोग्राम Complete होने के बाद BIOS ऑपरेटिंग सिस्टम को सिस्टम से कनेक्ट प्राइमरी हार्ड डिस्क या बूट डिवाइस से प्राइमरी मेमोरी में लोड करता है।
बायोस के मुख्य कार्य Main Functions Of BIOS
कंप्यूटर स्टार्ट होते ही BIOS सिस्टम से कनेक्टेड सभी डिवाइस को डिटेक्ट करता है , टेस्ट करता है और सिस्टम के अनुसार कॉन्फ़िगर करके सिस्टम के ऑपरेटिंग से कम्युनिकेशन कराने का कार्य करता है। बायोस द्वारा की जाने वाली सभी प्रक्रिया को सिस्टम का बूट प्रोसेस कहा जाता है। यह कार्य प्रत्येक BIOS के द्वारा मुख्य चार चरणों में किया जाता है।
- Power-on self-test (POST) : बायोस द्वारा चलाया गया यह सबसे पहला प्रोग्राम होता है जिसमे बूट के लिए आवश्यक हार्डवेयर डिवाइस जैसे की Memory ,CPU , Keyboard/Mouse ,Hard disk , आदि डिवाइस को चेक किया जाता है उसके बाद मेमोरी में OS को लोड किया जाता है।
- Bootstrap loader : बूट लोडर एक छोटा प्रोग्राम होता है जो प्रत्येक ऑपरेटिंग सिस्टम में रहता है जैसे की विंडोज के लिए boot MGR और लिनक्स के लिए grub . यह प्रोग्राम Post होने के बाद OS को स्टार्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- Software/drivers : मेमोरी में ऑपरेटिंग को लोड करने के बाद boot Loader ऑपरेटिंग सिस्टम को स्टार्ट करते समय सिस्टम के सॉफ्टवेयर और ड्राइवर को स्टार्ट और लोड करता है।
- BIOS Setup या CMOS Setup – कॉन्फ़िगरेशन प्रोग्राम जो आपको सिस्टम को अपने हिसाब से सेटिंग करने के लिए आवश्यक होती है जैसे सिस्टम Date & Time और Computer Password और अन्य कंप्यूटर सेटिंग करने की अनुमति देता है।
बायोस निर्माता कंपनी के नाम Name OF bios manufacturer company
बायोस क्या है (BIOS Kya Hai ) कैसे कार्य करता है जानने के बाद अपने मन में एक डाउट आया होगा की कौन सी कंपनी बायोस चिप को बनाती है जैसा की हमने पहले BIOS के इतिहास में पड़ा था की सबसे पहले बायोस को IBM में डेवेलोप किया था बाद में अन्य कंपनी जैसे की Phoenix Technologies और Hewlett Packard ने बायोस का निर्माण करना शुरू किया है । आज के समय में अनेको कम्पनिया मदर बोर्ड और बायोस का निर्माण करती है। जिसे आप नीचे की लिस्ट में देख सकते है।
- HP
- American Megatrends Inc. (AMI)
- Phoenix Technologies
- ALi
- Foxconn
- Winbond
- dell
- IBM
- Asus
- Ricoh
क्या कंप्यूटर के बायोस चिप को अपडेट या अपग्रेड किया जा सकता है।
यदि आप सिस्टम के मदर बॉर्ड में लेटेस्ट और कुछ नए फीचर को जोड़ना चाहते है तो इसके लिए आप सिस्टम के बायोस को अपग्रेड या फिर चेंज कर सकते है। बायोस एक प्रकार की Flash Memory होती है जो कंप्यूटर के मदर बॉर्ड में प्रोसेसर के आस पास होती है जिसे कुछ टेक्निकल प्रक्रिया से अपग्रेड किया जा सकता है। सिस्टम में बायोस को अपडेट करने से पहले इस बात को सुनिश्चित कर ले की आपके सिस्टम के अन्य डिवाइस अपडेट बायोस के साथ अनुकूल (Compatible) है या नहीं।
सिस्टम का बायोस कैसे चेक करें How To Check System BIOS
सिस्टम का बायोस और बायोस सेटिंग को चेक करने के लिए आपको बायोस के सेटअप में जाने की जरुरत होगी । सिस्टम के बायोस में जाने के लिए बायोस और मदर बोर्ड निर्माता कंपनी कुछ HotKey (स्पेशल की )का निर्माण करती है जिसकी सहायता से आप बायोस के सेटअप में जा सकते है। बायोस के सेटअप में जाने के लिए सबसे पहले आपको यह कन्फर्म करना है की सिस्टम में किस ब्रांड का मदर बोर्ड इस्तेमाल हो रहा है यदि आप ब्रांडेड कंप्यूटर या लैपटॉप इस्तेमाल कर रहे है तो इसका पता लगाना आसान है जिसे प्रायः सिस्टम के बॉडी से पता कर सकते है जैसे की dell , HP, Asus , Lenovo , Sony आदि।
यदि आप Assemble सिस्टम या आपके सिस्टम में कभी मदर बोर्ड चेंज किया गया है तो इसका पता लगाने के लिए आपको सिस्टम स्टार्ट करने की जरुरत होगी और सिस्टम के स्टार्ट होने पर स्क्रीन में कुछ सेकंड के लिए आने वाली पहली इमेज मदर बोर्ड निर्माता कम्पनी का नाम दिखाती है
सिस्टम के बायोस में कैसे जाये
जैसे की आप कंप्यूटर या लैपटॉप को स्टार्ट करने के लिए स्टार्ट बटन प्रेस करते है तो उसके बाद आपको सिस्टम में लगे मदर बोर्ड के अनुसार Hotkey प्रेस करते रहना है जब तक बायोस के सेटअप स्क्रीन आपके स्क्रीन में दिखाई न दे। नीचे हम कुछ मदर बोर्ड निर्माता कंपनी के नाम और उनकी Hotkey बता रहे है जिसका उपयोग आप बायोस सेटअप में जाने के लिए कर सकते है।
- Acer: F2 or DEL
- ASUS: F2
- Dell : F2 or F12
- HP: ESC or F10
- Lenovo: F2 or Fn + F2
- Lenovo (Desktop): F1
- MSI: DEL
सबसे पहला BIOS कौन सा था? First Computer BIOS Name
दुनिया का पहला बायोस Gary Kildall द्वारा 1974 में विकसित किया गया था जिसका उपयोग CP/M ऑपरेटिंग सिस्टम में इस्तेमाल किया गया था। Gary Kildall ने मशीन को सक्षिप्त में वर्णन करे के लिए इस सॉफ्टवेयर को बायोस नाम दिया जो बूट से सम्बंधित फाइल को लोड करता है और सिस्टम से कनेक्ट अन्य डिवाइस से कम्यूनिकेट करता है।
कंप्यूटर बायोस के प्रकार Types OF Computer BIOS
प्रत्येक कंप्यूटर यूजर अपने सिस्टम के बायोस के बारे में डिटेल्स में जान सकता है और जरुरत पड़ने पर उसे अपने अनुसार कॉन्फ़िगर भी कर सकता है लेकिन आप में से कुछ यूजर को बायोस के बारे में जानकरी होती है तो कुछ को नहीं। बायोस क्या है (BIOS Kya hai) इसका पता कैसे लगाए इसके बारे में हम पहले ही बता चुके है। आर्टिकल के इस भाग में हम बायोस के बारे में जानेगे। BIOS मुख्यतः दो प्रकार की होती है।
UEFI BIOS : इस बायोस का पूरा नाम Unified Extensible Firmware Interface जो 2.2 TB (Tera Byte) या इससे अधिक ड्राइव को सपोर्ट करता है। यह ड्राइव के लिए GPT टेक्नोलॉजी के स्थान पर MBR (Master Boot Record) टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करता है जो आज के समय में ड्राइव के पार्टीशन के लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है।
Legacy BIOS: लिगेसी बायोस का उपयोग पहले के पुराने कंप्यूटर में उपयोग किया जाता है। लिगेसी बायोस 2.1 TB से अधिक साइज के ड्राइव को हैंडल और सिस्टम में डिटेक्ट करने में असमर्थ होता है।
BIOS और UEFI में अंतर Difference Between BIOS And UEFI
आज के लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से युक्त मॉर्डन कंप्यूटर और लैपटॉप में आपको UEFI बायोस सेटअप अधिक देखने को मिलेगा। यदि आप BIOS और UEFI प्रोग्राम में अंतर को समझना चाहोगे तो आपको इसे समझने में थोड़ी परेशानी हो सकती है क्योकि दोनों में लगभग एक जैसे कार्य करते है दोनों BIOS ऑपरेटिंग सिस्टम और हार्डवेयर के बीच इंटरमीडिएट के जैसे कार्य करते है। लेकिन हम UEFI और BIOS प्रोग्राम के सेटअप की डिटेल्स से समझे तो UEFI एक एडवांस प्रोग्राम है।
UEFI में BIOS की तुलना में अधिक फीचर देखने को मिलेंगे और इसे जरुरत के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकता है UEFI को ड्राइव से मेमोरी में ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करने के लिए अलग से बूटलोडर की आवश्यकता नहीं पड़ती है। UEFI बायोस प्रोग्राम में 2 TeraByte से अधिक के ड्राइव को मैनेज करने की क्षमता होती है क्योकि यह GPT टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करता है।
बायोस में किस तरह की सेटिंग की जा सकती है
बायोस ऑपरेटिंग सिस्टम और सिस्टम हार्डवेयर के बीच इंटरमीडिएट के जैसे कार्य करने वाला प्रोग्राम है तो इसके द्वारा आप हार्डवेयर की ऐसी सेटिंग कर सकते है जिसे OS के द्वारा करवाना या नहीं करवाना चाहते है। बायोस की कुछ मुख्य सेटिंग्स को बता रहे है जिसे आप बायोस सेटअप से Enable /Disable और कस्टमाइज कर सकते है।
- बूट ऑर्डर बदला जा सकता है
- BIOS के लिए पासवर्ड सेट कर सकते है और हटा सकते है।
- सिस्टम के लिए डेट और टाइम सेट और रिसेट कर सकते है।
- फ़्लॉपी ड्राइव से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- हार्ड ड्राइव से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- CD/DVD/BD ड्राइव से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- सिस्टम में इनस्टॉल मेमोरी की कुल क्षमता चेक कर सकते है।
- कंप्यूटर के लोगो को show और हाईड कर सकते है।
- Quick Power on Self Test (POST) को इनेबल डिसेबल कर सकते है
- इंटरनल CPU कैश Enable या disable कर सकते है
- BIOS कैशिंग को सक्षम या अक्षम करें
- सीपीयू से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- मेमोरी से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- RAID Enable या disable कर सकते है
- ऑनबोर्ड यूएसबी Enable या disable कर सकते है
- IEEE1394 को Enable या disable कर सकते है
- ऑनबोर्ड ऑडियो Enable या disable कर सकते है
- ऑनबोर्ड सीरियल/समानांतर बंदरगाहों को सक्षम या अक्षम करें
- पावर बटन से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- Power On से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- फैन स्पीड से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- सीपीयू और सिस्टम टेम्प्रेचर से सम्बंधित सेटिंग्स कर सकते है
- सिस्टम फैन पंखे की स्पीड को देख सकते है
लेखक के अंतिम शब्द
इस आर्टिकल में हमने जाना की बायोस क्या है (BIOS Kya Hai ) कितने प्रकार की होती है और कैसे कार्य करती है उम्मीद करते है की यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा और bios से सम्बंधित सभी डाउट क्लियर हो गए होंगे। यदि आर्टिकल पसंद आया होगा तो इसे सोशल मीडिया और दोस्तों के साथ शेयर करे और हमारे मिशन “Sabhi Technical bane ” को अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाने हे हेल्प करे। इसी तरह की टेक्निकल जानकारी के लिए हमारे अन्य ब्लॉग siyaservice.com पर जाये