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Network Protocol के प्रकार और उनके कार्य

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इस आर्टिकल में हम आपको नेटवर्किंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रमुख प्रोटोकॉल के नाम (Types of Protocol in Hindi)और उनके कार्यो के बारे में बताने वाले है। इसके पहले वाले आर्टिकल में हमने विस्तार से जाना था की प्रोटोकॉल क्या होता (What Is Protocol )है और उसका क्या कार्य होता है। यदि आपको नेटवर्किंग को डिटेल्स में समझना है तो प्रोटोकॉल को अच्छे से समझने की आवश्यकता है। नेटवर्किंग में कनेक्शन , कम्युनिकेशन , डाटा शेयरिंग आदि के लिए सैकड़ो प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है। 

नीचे आप नेटवर्किंग में सबसे अधिक उपयोग किये जाने वाले प्रोटोकॉल के नाम और उनके बारे में  संक्षिप्त  विवरण देख सकते है। अब आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा की प्रोटोकॉल क्या होता है।  नेटवर्क प्रोटोकॉल नेटवर्क को सही तरीके से कार्य करने के लिए बनाये गए कुछ इंस्ट्रक्शन और नियमो का एक समूह होता है।  नेटवर्क प्रोटोकॉल कुछ स्टैण्डर्ड नियम , प्रोसीजर और इंस्ट्रक्शन से बने होते है जो नेटवर्क से कनेक्ट डिवाइस के साथ कम्यूनिकेट और डाटा शेयरिंग करने में मदद करते है

नेटवर्क प्रोटोकॉल के प्रकार Types of Protocol in Hindi

Types of Protocol in Hindi में प्रोटोकॉल मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते है । इनमें नेटवर्क मैनेजमेंट प्रोटोकॉल, नेटवर्क कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और नेटवर्क सिक्योरिटी प्रोटोकॉल। नेटवर्क कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल में HTTP, TCP ,UDP RDP , नेटवर्क मैनेजमेंट में SNMP , ICMP और सिक्योरिटी प्रोटोकॉल में SSL ,SFTP , SSH , HTTPS ,Telnet आदि प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है।

HTTP (Hypertext Transfer Protocol):

Internet की दुनिया में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्रोटोकॉल है। HTTP प्रोटोकॉल का इस्तेमाल हाइपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट को एक या एक से अधिक सिस्टम के बीच ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है। नेटवर्क से किसी वेबसाइट वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है।

HTTPs (Hypertext Transfer Protocol Secure)

  यह HTTP की तरह कार्य करता है लेकिन HTTP की तुलना में HTTPS क्लाइंट और सर्वर के माध्यम सिक्योर तरीके से कम्युनिकेशन और डाटा ब्राउज कराने का कार्य करता है। वेबसाइट को एक्सेस करने के लिए यह सबसे सिक्योर प्रोटोकॉल है जो पोर्ट नंबर 443 पर वर्क करता है। आज के समय में इंटरनेट पर अधिकतर वेबसाइट को होस्ट करने के लिए HTTPS प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है।

Transmission Control Protocol (TCP)

नेटवर्किंग की दुनिया में TCP एक पॉपुलर प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग नेटवर्क में कम्युनिकेशन  करने के लिए किया जाता है। कम्युनिकेशन के लिए यह सबसे Trusted प्रोटोकॉल माना जाता है। इस प्रोटोकॉल में मैसेज जिसे  सोर्स से डेस्टिनेशन तक भेजना है उसे  पैकेटों की सीरीज  में विभाजित करता है  और फिर डेस्टिनेशन में डाटा पैकेट पहुंचने के बाद फिर से उसी सीरीज में जोड़ने का कार्य करता है।

IP (Internet Protocol) :

आईपी को मुख्य रूप से  एड्रेसिंग प्रोटोकॉल के रूप में डिज़ाइन किया गया है। इसका उपयोग TCP प्रोटोकॉल के साथ किया जाता है।  यह डाटा पैकेट को विभिन्न नेटवर्क या डिवाइस से होते हुए सही नेटवर्क और डिवाइस तक पहुंचाने में मदद करता है।  इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP ) के प्रमुख दो वर्शन IPv4  और IPv6 जिनका उपयोग नेटवर्किंग सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

UDP (User Datagram Protocol ):

UDP प्रोटोकॉल भी TCP प्रोटोकॉल की तरह कार्य करता है ,  नेटवर्क पर डेटा के पैकेट को भेजने का कार्य करता है ।दोनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि टीसीपी सुनिश्चित करता है कि एप्लिकेशन और सर्वर के बीच एक  कनेक्शन क्रिएट  गया है, लेकिन UDP ऐसा  नहीं करता है। UDP एक connection-less प्रोटोकॉल है इसलिए TCP की तरह इसमें डाटा ट्रांसमिट करने से पहले किसी प्रकार के कनेक्शन को स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती है।

FTP (File Transfer Protocol):

 Types of Protocol in Hindi में इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल नेटवर्क  से कनेक्ट एक  सिस्टम से दूसरे सिस्टम में File  , प्रोग्राम , मल्टीमीडिया फाइल , टेक्स्ट इत्यादि  डाटा आदि को  ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पहले के समय में फाइल ट्रांसफर के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला प्रोटोकॉल था लेकिन अब FTP की जगह इसके एडवांस और सिक्योर प्रोटोकॉल SFTP का इस्तेमाल किया जाता है।

SFTP (Secure File Transfer Protocol )

यह FTP के जैसे फाइल और अन्य डाटा को एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में सिक्योर तरीके से ट्रांसफर करके के लिए उपयोग किये जाना वाला प्रोटोकॉल है। इस प्रोटोकॉल से डाटा ट्रांसमिट करने के लिए एन्क्रिप्शन और ऑथेंटिकेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। आज के समय में नेटवर्क से फाइल डाउनलोड और अपलोड  करने के लिए इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया  जाता है।

DNS (Domain Name System):

इस प्रोटोकॉल की मदद से हम  नेटवर्क या इंटरनेट से कनेक्ट किसी कंप्यूटर या सर्वर को उसके नाम से एक्सेस कर पाते है। नेटवर्क में यदि इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल न किया जाए तो हमें नेटवर्क से connect कंप्यूटर या सर्वर को उसके IP एड्रेस से एक्सेस करना होगा जो एक टेक्निकल काम होगा। इस प्रोटोकॉल की मदद से IP एड्रेस को Domain नाम और डोमेन नाम को IP एड्रेस में आसानी से बदला जा सकता है।

SMTP (Simple Mail Transfer Protocol):

इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल  एक mail सर्वर से दूसरे mail सर्वर में मेल को ट्रांसमिट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।Mail सर्विस के लिए इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल सबसे अधिक किया जाता है।

POP3 (Post Office Protocol version 3):

इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल ईमेल प्राप्त करने के लिए किया जाता है। एप्लिकेशन-लेयर प्रोटोकॉल हैं जिनका उपयोग इंटरनेट पर इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग के लिए किया जाता है। POP3 एक प्रोटोकॉल है जिसमें सर्वर और क्लाइंट दोनों में इस्तेमाल किया जाता है।

DHCP (Dynamic Host Configuration Protocol):

 नेटवर्क से कनेक्ट विभिन्न डिवाइस को IP एड्रेस Automatic और Manual दो तरीके से सेट किया जाता है। मैन्युअल में नेटवर्क इंजीनियर को प्रत्येक सिस्टम के नेटवर्क सेटिंग में जाकर सेट किया जाता है और आटोमेटिक में IP एड्रेस को DHCP सर्वर के द्वारा सेट किया जाता है। DHCP प्रोटोकॉल का इस्तेमाल नेटवर्क से कनेक्ट विभिन्न कंप्यूटर , प्रिंटर ,स्कैनर आदि डिवाइस को ऑटोमैटिक IP एड्रेस उपलब्ध कराने  का कार्य करता है।

SNMP (Simple Network Management Protocol):

OSI Model के एप्लीकेशन लेयर में इस्तेमाल किया जाने वाला प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग LAN और WAN से कनेक्ट नेटवर्क डिवाइस को मॉनिटर और मैनेज करने के लिए किया जाता है। SNMP मैनेजर और एजेंट तकनीक के अनुसार कार्य करता है। जहा पर SNMP Manager क्लाइंट के रूप में कार्य करता है ,SNMP Agent सर्वर के रूप में कार्य करता है और MIB सर्वर के डेटाबेस के रूप में कार्य करता है। जब SNMP मैनेजर एजेंट से कोई request है, तो एजेंट रिप्लाई देने के लिए MIB का उपयोग करता है।

SSH (Secure Shell):

SSH रिमोट लॉगिन के लिए इस्तेमाल होने वाला सिक्योर प्रोटोकॉल है।  इस प्रोटोकॉल की मदद से रिमोट सर्वर , नेटवर्क डिवाइस , और अन्य सिस्टम को एक्सेस करने के लिए सिक्योर और एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने में मदद करता है। एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम या एक सर्वर से दूसरे सर्वर को एक्सेस करने और डाटा ट्रांसफर के लिए SSH प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है क्योकि इससे दो डिवाइस के बीच एन्क्रिप्टेड कनेक्शन होता है। सिस्टम में SSH को इनस्टॉल और कॉन्फ़िगर करने के लिए इस आर्टिकल को पढ़े

SSL (Secure Socket Layer)

SSL एक सिक्योर  प्रोटोकॉल है जिसका मुख्य रूप से सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन सुनिश्चित करने और सेंसिटिव डाटा को सुरक्षित करने के लिए  उपयोग किया जाता है। यह प्रोटोकॉल सर्वर/क्लाइंट कम्युनिकेशन  के साथ-साथ सर्वर से सर्वर कम्युनिकेशन की परमिशन  दे सकता है।

ICMP (Internet Control Message Protocol):

इस प्रोटोकॉल का मुख्य कार्य नेटवर्क को मॉनिटर और मैनेज करना होता है।  इस प्रोटोकॉल के इस्तेमाल से नेटवर्क में आने वाले विभिन्न एरर मैसेज को समझने और नेटवर्क में डिवाइस की कनेक्टिविटी के बारे में जानकारी प्राप्त करने किया जा सकता  है।

NTP (Network Time Protocol):

 इस प्रोटोकॉल की मदद से डिवाइस सर्वर से डेट और टाइम को रिसीव करता है लेकिन इसके लिए डिवाइस को NTP सर्वर  से कनेक्ट होना जरूरी होता है और डिवाइस में clock synchronization ऑन होना चाहिए । इसका सही उदाहरण मोबाइल और कंप्यूटर में दिखने वाला Date & Time जो NTP सर्वर से एक्सेस प्राप्त होता है।

RDP (Remote Desktop Protocol):

इस प्रोटोकॉल को मुख्य रूप से माइक्रोसॉफ्ट द्वारा डेवलप  किया गया है जिसका उपयोग ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस (GUI ) की मदद से किसी भी  अन्य कंप्यूटर या सर्वर को रिमोट से एक्सेस करना होता है। माइक्रोसॉफ्ट के प्रत्येक सिस्टम को रिमोट से एक्सेस करने के लिए उपयोग किया जाने वाला प्रोटोकॉल है।

 NAT (Network Address Translation) 

NAT इस प्रोटोकॉल की मदद से एक पब्लिक IP एड्रेस की मदद से अनेको प्राइवेट IP एड्रेस से युक्त डिवाइस  को इंटरनेट एक्सेस करने की सुविधा देना होता है। NAT  networking device router  पर काम करता है, जो  दो नेटवर्क को एक साथ जोड़ता है जिससे प्राइवेट IP इंटरनेट एक्सेस कर पाता है।

PPP (Point-to-Point Protocol):

OSI Model के डाटा लिंक लेयर पर वर्क करने वाला प्रोटोकॉल है जिसका इस्तेमाल पॉइंट टू पॉइंट कनेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि आप होम नेटवर्क से किसी वेबसाइट को एक्सेस करते है तो कनेक्शन के लिए आप इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते है।

VLAN (Virtual Local Area Network):

VLAN एक प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग  स्विच में कॉन्फ़िगर किये जाने वाले विभिन्न वर्चुअल LAN के साथ डाटा को सेंड करने और अन्य तरह के कम्युनिकेशन करने में मदद करता है।VLAN की मदद से एक switch डिवाइस में कई अलग अलग नेटवर्क बनाये जा सकते है।

हमें उम्मीद है कि नेटवर्क प्रोटोकॉल के लिए (Types of Protocol in Hindi) यह आर्टिकल आपके लिए बहुत हेल्पफुल होने वाला है । यदि आपको नेटवर्किंग या टेक्निकल से सम्बंधित किसी भी टॉपिक को समझने में परेशानी हो रही है और उसका समाधान आपको अभी तक नहीं मिल पा रहा है तो हम आपकी मदद करने के लिए तैयार है।

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siya

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