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Peer to Peer Network क्या है? इसका उपयोग और कैसे काम करता है?

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आज के इस आर्टिकल जानेगे की Peer To Peer नेटवर्क क्या है? peer to peer का इतिहास , कैसे कार्य करता है। Peer To Peer Network In Hindi में आप जानेगे की इस नेटवर्क इस्तेमाल करने के फ़ायदे और नुकसान क्या हो सकते है। Peer To Peer नेटवर्क के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े और अपना फीडबैक दे।

पीयर टू पीयर नेटवर्क क्या है What is Peer To Peer Network In Hindi

peer to peer नेटवर्क का एक प्रकार है जहा पर नेटवर्क से कनेक्ट  Node  (कंप्यूटर ) बिना  किसी सर्वर या hierarchical structure के डायरेक्ट  किसी अन्य node  से कनेक्ट रहता  रहता है। P2P नेटवर्क में प्रत्येक node (कंप्यूटर ) सर्वर और क्लाइंट दोनों तरह से कार्य करता है जिससे  नेटवर्क में  रिसोर्स और  अन्य  इनफार्मेशन को शेयर करने का कार्य  करता है।

peer to peer network in hindi

नेटवर्क में peer  to peer नेटवर्क इस्तेमाल करने का  अपना फायदा है क्योकि यह सेंट्रलाइज नेटवर्क की तुलना में अधिक फ्लेक्सिबल होता  है। इसमें क्लाइंट किसी Centralise सर्वर पर निर्भर नहीं रहता है।   लेकिन peer to peer को मैनेज करना और सिक्योर करना एक चैलेन्स भरा टास्क होता है क्योंकि प्रत्येक नोड को अपनी सुरक्षा और डेटा मैनेजमेंट  के लिए स्वयं जिम्मेदार होना पड़ता  है।

P2P नेटवर्क का उपयोग विभिन्न एप्लीकेशन के लिए किया जा सकता है, जिसमें फाइल शेयरिंग, मैसेजिंग और अन्य  सहयोगी कार्य शामिल हैं। P2P नेटवर्क के को समझ सकते है जहा पर  BitTorrent  में फाइल शेयरिंग करने के लिए इस्तेमाल किया जाना Skype में  मेसेजिंग और वॉइस  कॉलिंग करने के लिए इस्तेमाल किया जाना सेंट्रलाइज तरीके से डिजिटल करेंसी बिट कॉइन को सिक्योर तरीके से अन्य लोग  को  ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है ।

P2P नेटवर्क का इतिहास

पीयर-टू-पीयर (पी2पी) का  इतिहास नेटवर्क के शुरुवाती  दिनों से माना जाता  है।  नीचे आप पीयर-टू-पीयर नेटवर्क के संक्षिप्त इतिहास के बारे में अचे से समझ सकते है।

1960 के दशक में, अमेरिकी सरकार की एक एजेंसी  एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी नेटवर्क (ARPANET) ने पैकेट स्विचिंग के कार्य में  सबसे पहले  आयी , जहा पर  कई यूज़र्स  को एक ही कम्युनिकेशन  चैनल को  शेयर  करने की परमिशन  दी  गयी थी । इसे  P2P नेटवर्किंग का प्रारंभिक चरण कहा जा सकता है ।

1980 के दशक में, Usenet ने  डिस्कशन फ़ोरम  के लिए एक  Decentralised network को डेवेलोप  किया गया था। जहा पर यूज़नेट ने यूज़र्स  को  बिना किसी Centralise  सर्वर के मैसेज को  पोस्ट करने और एक दूसरे के साथ फ़ाइलें शेयर  करने जैसे फीचर उपलब्ध कराये गए  ।

1990 के दशक में, पहला फाइल-शेयरिंग प्रोग्राम विकसित किया गया था। इस प्रोग्राम की मदद से apster और  Gnutella ने यूजर को इंटरनेट के माध्यम से एक दुसरे को music और अन्य तरह की फाइल्स को शेयर करने सुविधा दिया । इन प्रोग्राम में  एक Decentralised architecture का इस्तेमाल किया गया जहा पर नेटवर्क से कनेक्ट प्रत्येक node क्लाइंट और सर्वर की तरह कार्य करता था.

2000 के दशक में, BitTorrent को पी2पी नेटवर्क पर बड़ी फ़ाइलों को शेयर  करने के एडवांस  तरीके के रूप में डेवलप  किया गया था। बिटटोरेंट में  कई यूज़र्स  एक फ़ाइल के विभिन्न पार्ट्स  को एक साथ डाउनलोड और अपलोड करते हैं।

आज के समय में , P2P नेटवर्क का उपयोग विभिन्न प्रकार के एप्लीकेशन  के लिए किया गया है, जिसमें क्रीपोकरेंसी  ,माइनिंग  , डीसेंट्रालाइज  सोशल नेटवर्क  आदि शामिल हैं।

Peer To Peer Network के प्रकार

अभी तक हमने जाना की पीयर-टू-पीयर क्या है और पीयर-टू-पीयर नेटवर्क का इतिहास ,अब हम जानेंगे की पीयर-टू-पीयर के कितने प्रकार होते है। प्रत्येक  पी2पी नेटवर्क के प्रकार में कुछ  फायदे और कुछ  नुकसान होते  हैं जिन्हे नेटवर्क की आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है।

  • Pure P2P Network: इस प्रकार के नेटवर्क ने  सभी Nodes  को Client  और सर्वर की तरह कार्य करने  के लिए सामान्य  जिम्मेदारी होती है।  इसमें प्रत्येक नोड इनफार्मेशन  और सर्विसेस के लिए अनुरोधों को आरंभ और प्रतिक्रिया दे सकता है।
  • Hybrid P2P Network : इस प्रकार के नेटवर्क में, कुछ Nodes  को सर्वर के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया जाता  है, जबकि अन्य को क्लाइंट के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस तरह का नेटवर्क सेंट्रालाइज या डीसेंट्रालाइज हो सकता है 
  • Structured P2P Network: इस प्रकार के नेटवर्क में Nodes  की पदानुक्रमित (Hierarchical)संरचना होती है जहा नोड्स एक स्पेसिफिक Topology के माध्यम से कनेक्ट रहते है। इस प्रकार के नेटवर्क में प्रत्येक  नोड्स को  उनकी स्थिति के आधार पर रूटिंग या स्टोरेज जैसी स्पेसिफिक रोल्स दिए जाते हैं।
  • Unstructured P2P Network : इस प्रकार के नेटवर्क में, कोई स्पेसिफिक  टोपोलॉजी या स्ट्रक्चर  नहीं होती है, और नोड बेतरतीब ढंग से एक दूसरे से जुड़े होते हैं। नेटवर्क खोज कर आवश्यक संसाधनों को खोजने के लिए नोड्स जिम्मेदार हैं। नेटवर्क में कुछ भी सर्च करने पर सभी नेटवर्क रिसोर्स को सर्च करने के लिए ज़िम्मेदार  होते है
  • Super Peer P2P Network: इस प्रकार के नेटवर्क में, कुछ नोड्स को “सुपर पीयर” के रूप में कार्य करने के नामित किया जाता है जो क्लाइंट और सर्वर के बीच इंटरमीडिएट की तरह  कार्य करते हैं। सुपर पीयर नोड की मुख्य जिम्मेदारी रिसोर्स को  इंडेक्सिंग करना  और सर्च को हैंडल करना होता  हैं।

Peer To Peer Network कैसे काम करता है

पीयर-टू-पीयर (पी2पी) नेटवर्क से कनेक्ट प्रत्येक नोड सर्वर और क्लाइंट दोनों तरह से कार्य करता है यानी की ये रिसोर्स को एक्सेस करने के लिए रिक्वेस्ट कर सकते है और नेटवर्क से कनेक्ट अन्य नोड्स को सर्विस भी देने का कार्य भी करते है।

जब यूजर किसी रिसोर्स (Data )को एक्सेस करने के लिए रिक्वेस्ट करता है तो रिक्वेस्ट नेटवर्क से कनेक्ट सभी नोड्स के पास ब्रॉडकास्ट हो जाता है इससे जिस नोट के पास रिक्वेस्ट से सम्बंधित रिसोर्स उपलब्ध रहता है वह रिक्वेस्ट नोड को रिसोर्स उपलब्ध कराता है।

पीयर-टू-पीयर (पी2पी) नेटवर्क को डिजाइन करने के अनेको तरीक़े है लेकिन सबसे कॉमन distributed hash table (DHT) तरीका है , DHT एक डेटाबेस होता है जो पीयर-टू-पीयर से कनेक्ट सभी नोड के बीच डिस्ट्रब्यूटस हो जाता है और रिसोर्स को सर्च करने में मदद करता है। नेटवर्क से कनेक्ट प्रत्येक नोड के पास एक यूनिक आइडेंटिफायर (unique identifier) होता है और जिससे DHT रिसोर्स को उनके ID के अनुसार पर नोड्स में मैप करता है।

P2P नेटवर्क का मुख्य उपयोग फ़ाइल शेयरिंग ,कंटेंट को डिस्ट्रीब्यूट करने और अन्य एप्लीकेशन रिसोर्स को शेयर करने के लिए इस्तेमाल होता है। सबसे पॉपुलर P2P नेटवर्क में BitTorrent जो फाइल को डाउनलोड और अपलोड करने , क्रीपोकररेन्सी में बिटकॉइन का ट्रांसक्शन करने आदि में इस्तेमाल होता है।

Peer To Peer Network का उदाहरण

peer to peer network in hindi में आपने अभी तक जाना की पीयर-टू-पीयर (पी2पी) क्या होता है , पीयर-टू-पीयर का इतिहास और यह कैसे कार्य करता है। अब हम जानेंगे की पीयर-टू-पीयर का इस्तेमाल कहा किया जाता है। वैसे Peer-to-peer (P2P) का इस्तेमाल अनेक तरह के कार्यो में किया जाता है। जिनके कुछ उदाहरणो को नीचे देख सकते है।

पीयर-टू-पीयर टेक्नोलॉजी को तो आप अच्छी तरह से समझ गए होंगे जहा पर यूजर अन्य किसी कंप्यूटर से डायरेक्ट कनेक्ट होता है मतलब की बीच में किसी तरह के Centralise सर्वर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

  • BitTorrent : यह P2P में फाइल शेयरिंग के लिए सबसे पॉपुलर प्रोटोकॉल है जहा पर यूजर को बड़ी फाइल को डाउनलोड करने और शेयर करने की सुविधा मिलती है।
  • Skype: यह Voice और video कालिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे पॉपुलर एप्लीकेशन है। इस टेक्नोलॉजी में भी P2P टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है जहा पर यूजर अन्य किसी यूजर से डायरेक्ट कनेक्ट हो सकता है।
  • Bitcoin: यह एक प्रकार की centralise डिजिटल करेंसी होती है जहा पर पीयर टू पीयर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अन्य किसी को डिजिटल करेंसी का ट्रांसक्शन किया जा सकता है।
  • Napster: P2P टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे पहला और पॉपुलर म्यूजिक शेयरिंग एप्लीकेशन है जहा पर यूजर म्यूजिक को अन्य किसी के साथ शेयर कर सकता है।
  • Gnutella: यह एक P2P नेटवर्क टेक्नोलॉजी है जहा पर यूजर अन्य किसी के साथ किसी भी तरह music, movies, और software को शेयर कर सकता है।
  • Freenet: P2P नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी है जहा पर यूजर किसी भी तरह की जानकारी को पब्लिक के लिए शेयर कर सकते है जिसे कोई भी एक्सेस कर सकता है।
  • Retroshare: यह एक इंस्टेंट मेसेजिंग और फाइल शेयरिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे पॉपुलर एप्लीकेशन है जहा पर यूजर अन्य किसी के साथ सुरक्षित तरीके से फाइल शेयरिंग और अन्य प्रकार के कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
  • Tor : यह एक पॉइंट टू पॉइंट नेटवर्क टेक्नोलॉजी है जहा यूजर अपनी प्राइवेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए anonymous तरीके से इंटरनेट को एक्सेस कर सकता है , यह उन लोगो के लिए सबसे अच्छा एप्लीकेशन है जो अपनी प्राइवेसी को सिक्योर रखना चाहते है।

Peer To Peer Network इस्तेमाल के फ़ायदे

peer to peer network in hindi में बताई जाने वाली इनफार्मेशन से आप संतुष्ट होंगे ऐसी हम उम्मीद करते है। इस भाग में हम आपको Peer To Peer Network के इस्तेमाल से होने वाले फ़ायदे के बारे में बताने वाले है।

  • Decentralization

P2P नेटवर्क का सबसे बड़ा फ़ायदा यहाँ है की यह एक डीसेंट्रालाइज नेटवर्क टेक्नोलॉजी है जहा पर कंप्यूटर को नेटवर्क से कनेक्ट करने और डाटा और कम्युनिकेशन के लिए किसी तरह से सर्वर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जहा पर सर्वर के डाउन होने और बीच में डाटा के लीक होने का ख़तरा नहीं रहता है।

  • Scalability

अन्य नेटवर्क टेक्नोलॉजी की तुलना में P2P नेटवर्क अत्यधिक स्केलेबल नेटवर्क माना जाता हैं, क्योंकि नेटवर्क में प्रत्येक नोड एक सर्वर के जैसे कार्य कर सकता है और नेटवर्क के बेहतर परफॉरमेंस के लिए अपनी क्षमता को सामान्य रूप से नेटवर्क में डिस्ट्रीब्यूट करता है।

  • Cost-effectiveness

P2P नेटवर्क अन्य नेटवर्क की तुलना में कम खर्चीला होता है क्योकि इसमें किसी तरह के सेंट्रालाइज और महंगे सर्वर को इनस्टॉल करने की जरुरत नहीं पड़ती है क्योकि इसमें नेटवर्क से कनेक्ट nodes को रिसोर्स को नेटवर्क में शेयर करते है।

  • Privacy:

client-server नेटवर्क की तुलना में P2P नेटवर्क अधिक सिक्योर माने जाते है क्योकि इसमें यूजर अन्य किसी नोड्स से डायरेक्ट कनेक्ट होता है जिससे अन्य किसी को इसकी एक्टिविटी को ट्रैक कर पाना मुश्किल होता है।

  • Accessibility:

यूज़र्स के लिए client-server नेटवर्क की तुलना में पीयर-टू-पीयर नेटवर्क को एक्सेस करना बहुत आसान होता है और यह अन्य नेटवर्क की तुलना में फ़ास्ट तरीके से कार्य करता है टेक्नोलॉजी में किसी एक नोड के काम न करने पर अन्य किसी नोड पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।

Peer To Peer Network की हानि

Peer To Peer Network In Hindi में अभी तक हमने इसके फायदे के बारे में जाना और उम्मीद करते है की इससे आपको सही जानकारी मिली होगी। इस भाग में हम पीयर-टू-पीयर नेटवर्क इस्तेमाल करने के कुछ नुकसान के बारे में जानने वाले है।

  • Network में डाटा की सुरक्षा में कमी

पीयर-टू-पीयर क्लाइंट सर्वर नेटवर्क टेक्नोलॉजी की तुलना में अधिक सुरक्षित नहीं है क्योकि इसमें नेटवर्क को मॉनिटर करने के लिए कोई सेंट्रलाइज डिवाइस इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इससे हैकर्स के लिए नेटवर्क में अटैक करना और पर्सनल डेटा हैक करना और सिस्टम में मैलवेयर डालना आसान हो जाता है।

  • विश्वसनीयता की कमी :

P2P नेटवर्क टेक्नोलॉजी में नेटवर्क में रिसोर्स को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अन्य नोड्स पर निर्भर रहती है। यदि कोई नोड नेटवर्क से हट जाता है या डाउन रहता है , तो उसके द्वारा शेयर कराये जाने वाले रिसोर्स उपलब्ध नहीं रहेंगे हैं, जिससे नेटवर्क फ़ैल भी हो सकता है।

  • सीमित क्षमता :

P2P नेटवर्क छोटे नेटवर्क के लिए सही माना जाता है , यदि नेटवर्क में नोड्स की संख्या बढ़ने लगाती है तो पी2पी नेटवर्क स्लो और फ़ैल भी हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नेटवर्क में प्रत्येक नोड को अन्य दूसरे नोड के साथ कम्यूनिकेट करना होता है , जिससे परिणाम स्वरुप नेटवर्क में बड़ी मात्रा में ट्रैफ़िक आ सकता है।

  • सर्विस की क्वालिटी में कमी

P2P नेटवर्क क्लाइंट सर्वर की तुलना में हाई क्वालिटी के सर्विस और कण्ट्रोल में सक्षम नहीं हो सकता है। क्योंकि नेटवर्क में हाई लेवल का ट्रैफ़िक आने पर कोई सेंट्रलाइज कण्ट्रोल नहीं रहता है, जिससे नेटवर्क रिसोर्स को सही तरीके से शेयर करने और रिसोर्स को स्लो तरीके से प्राप्त करने जैसी प्रतिक्रिया देखि जा सकती है।

  • सरकारी लीगल समस्या

पी2पी नेटवर्क का उपयोग अक्सर कॉपीराइट की गई मटेरियल (Tor browser access , Crypocurrecny , bit torrent आदि ) को शेयर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कानूनी समस्याएं हो सकती हैं।कई देशों में ऐसे कानून हैं जो कॉपीराइट किये गए कंटेंट को शेयर करने पर रोक लगाते हैं, और कॉपीराइट किये गए कंटेंट को शेयर करते हुए पकड़े जाने पर P2P नेटवर्क के यूज़र्स पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है है।

क्लाइंट सर्वर और पीयर टू पीयर नेटवर्क के बीच अंतर

अभी तक आपने peer To Peer नेटवर्क के बारे में जाना , जिसको समझाने के लिए हमने कई बार क्लाइंट सर्वर के बारे में भी चर्चा किया। लेकिन क्या आपको क्लाइंट सर्वर और पीयर-टू-पीयर नेटवर्क के बीच अंतर को अच्छे से समझ आता है। नीचे टेबल के माध्यम से दोनों के अंतर को अच्छे से समझ सकते है।

Peer To Peer Network In Hindi
Client Server Network Peer To Peer Network
इस नेटवर्क टेक्नोलॉजी में क्लाइंट और सर्वर अलग अलग होते है जिसे सर्वर रिसोर्स को उपलब्ध कराने और क्लाइंट डाटा को एक्सेस करता है।पीयर-टू-पीयर नेटवर्क में सर्वर और क्लाइंट अलग-अलग नहीं होते हैं नेटवर्क ने दोनों कम्युनिकेशन और डाटा शेयरिंग के लिए इस्तेमाल होते है।
क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क टेक्नोलॉजी में क्लाइंट द्वारा स्टोर और एक्सेसकिये जाने वाले डाटा का एक या एक से अधिक सेंट्रलाइज्ड सर्वर होते है.पीयर-टू-पीयर नेटवर्क टेक्नोलॉजी में प्रत्येक पीयर अपना डेटा स्वयं स्टोर करता है।
क्लाइंट-सर्वर में नेटवर्क टेक्नोलॉजी में डाटा , क्लाइंट की प्राइवेसी के लिए पॉलिसी और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाये जाते हैपीयर-टू-पीयर नेटवर्क में मॉनिटरिंग और नेटवर्क से कनेक्ट क्लाइंट की सिक्योरिटी के लिए कोई पॉलिसी नहीं होती है
क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क टेक्नोलॉजी पीयर-टू-पीयर नेटवर्क टेक्नोलॉजी की तुलना में थोड़ी महंगी होती है क्योकि इसमें सेंट्रलाइज सर्वर होता हैपीयर-टू-पीयर नेटवर्क टेक्नोलॉजी क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क की तुलना में सस्ती और इसे आसानी से सेटअप किया जा सकता है।
क्लाइंट-सर्वर नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल छोटे और बड़े दोनों प्रकार के नेटवर्क के लिए किया जा सकता है.पीयर-टू-पीयर नेटवर्क में लिमिटेड कंप्यूटर को जोड़ा जा सकता है , अधिक कंप्यूटर को कनेक्ट करने पर नेटवर्क फ़ैल ,अन्य कंप्यूटर के डिस कनेक्ट और स्लो स्पीड जैसी समस्या देखी जा सकती है
Client-Server नेटवर्क का मुख्य कार्य नेटवर्क से कनेक्ट कंप्यूटर को डाटा शेयर करना होता हैपीयर-टू-पीयर नेटवर्क अन्य कंप्यूटर के साथ कनेक्शन स्थापित करने के लिए किया जाता है

निष्कर्ष

Peer To Peer Network In Hindi हमने आपको पीयर-टू-पीयर नेटवर्क के बारे में विस्तृत जानकरी देने का प्रयास किया और उम्मीद करते है की आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। किसी तरह डाउट और सवाल के लिए नीचे कमेंट करे।

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siya

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