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बीआईएस क्या है इतिहास , कार्य और इसके फ़ायदे

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नमस्कार मित्रो आज का हमारा आर्टिकल आपके लिए बेहद ही उपयोगी होने वाला है क्योंकि इसमें हम आपको बीआईएस के बारे में बताने जैसे की बीआईएस क्या होता है बीआईएस का फुल फॉर्म (BIS Full Form in Hindi) इसके प्रमुख कार्य व इसके फायदे। बीआईएस से जुड़ी पूरी जानकारी व इससे जुड़ी अन्य उपयोगी जानकारी प्राप्त करने के लिए इसे अंत तक पढ़े .

BIS क्या होता है?

बीआईएस का फुल फॉर्म Bureau of Indian Standards होता है जिसे हिंदी में भारतीय मानक ब्यूरो कहते है। बीआईएस भारत सरकार के नियमो पर कार्य करती है देश में निर्मित किये जाने वाले प्रोडक्ट की क्वालिटी को बनाये रखने के लिए एक स्टैण्डर्ड देने का बीआईएसकार्य करती है। बीआईएस द्वारा दिए गए स्टैण्डर्ड से किसी भी प्रोडक्ट की शुद्धता को समझाना आसान होता है।

BIS सभी कीमती धातुओं पर एक प्रकार का कोड लगाती है ताकि इसे खरीदने वाला व्यक्ति यह पता लगा सके कि यह धातु कितने प्रतिशत शुद्ध हैं और धातु या आभूषण को बनाने में इसमें अन्य धातुओं का इस्तेमाल कितना प्रतिशत किया गया हैं,  किसी भी धातु पर हॉल मार्किंग की सुविधा बहुत ही पुरानी है अलग-अलग देशों में धातुओं की शुद्धता के लिए अपना एक स्टैण्डर्ड होता है मतलब की सभी देशों का अपना अलग-अलग हॉल मार्क होता है, जिससे की ग्राहक यह जान जाए कि वह धातु कितना प्रतिशत शुद्ध है।

बीआईएस, ISI (Indian Standards Institute) के आधार पर काम करता है। हमारे भारत में सोना कैरेट में मापा जाता है जैसे की कैरेट 18, 20 कैरेट, 22 कैरेट और 24 कैरेट और उस पर एक तरह का नंबर लगा दिया जाता है जिसे हम स्टैण्डर्ड हॉलमार्क कोड कहते हैं।

उदाहरण के लिए मान लीजिए कि कोई बहुमूल्य धातु है और इसके ऊपर कोई अंक लगाया गया हो जैसे 975, इसका मतलब यह हुआ कि वह मूल्यवान धातु 97.5% शुद्ध हैं और 2.5% उसमे मिलावटी धातु का प्रयोग किया गया, इसी तरह सभी धातुओं पर विभिन्न प्रकार का हॉलमार्क कोड लगाया जाता है

Bureau of Indian Standards

BIS कब से काम कर रहा है?

BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) 6 जनवरी 1947 से काम कर रहा है। पहले यह ISI के नाम से काम करता था। देश के राष्ट्रीय ध्वज का आकार भी BIS द्वारा तैयार किया गया था। भारत में बीआईएस की सुविधा 26 नवंबर 1986 को पारित की गई थी, और 1 अप्रैल 1987 को लागू किया गया था,

हॉलमार्क  चिन्ह बहुमूल्य धातुओं पर लगाने की वजह क्या है?

वैसे तो धातुओं की शुद्धता को मापने के अनेको तरीके है लेकिन BIS हॉलमार्क कोड की सहायता से एक आम इंसान भी इसकी शुद्धता का पता आसानी से लगा सकता हैं जैसे हॉलमार्क कोड की मदद से सोने पर 936 अंक लगाया जाता हैं तो इसका मतलब है कि इसमें से 93.6% शुद्ध सोना है और 6.3 % अन्य धातुओं का का इस्तेमाल किया गया है। इसी तरह, सभी कीमती धातुओं पर हॉलमार्क कोड का एक अंक लगाया जाता हैं जिससे उसकी शुद्धता का पता लगा सकते है।

नीचे कुछ हॉलमार्क नंबर दिए गए है जिससे आप सोने की शुद्धता का पता लगा सकते है।

  • हॉलमार्क नंबर 564 है, तो इसमें 56.4% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 769 है, तो इसमें 76.9% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 654 है, तो इसमें 65.4% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 916 है, तो इसमें 91.6% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 461 है, तो इसमें 46.1% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 560 है, तो इसमें 56% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 1000 है, तो इसमें 100% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 101 है, तो इसमें 10.0% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 111 है, तो इसमें 11.1% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।
  • हॉलमार्क नंबर 999 है, इसलिए इसमें 99.9% (प्रतिशत) शुद्ध सोना होता है।

BIS का क्या कार्य है?

  • BIS मानको का निर्माण करता है।
  • यह उपभोक्ताओ की गतिविधियों पर नजर रखता है।
  • BIS उत्पाद की गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। व उन्हें नियंत्रण करता है।

BIS के क्या लाभ है?

  • BIS के कारण उपभोक्ताओं को कीमती धातुओं में हो रही मिलावट से बचाया जाता है।
  • राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में BIS के द्वारा मदद मिलती रहती है।
  • BIS स्वास्थ्य संबंधी खतरों के जोखिम को कम करता है और उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखता है।
  • BIS के माध्यम से आयात और निर्यात के साधन भी बढ़ते हैं।
  • BIS के द्वारा धातुओं की शुद्धता का प्रतिशत जानना आसान हो जाता है।

BIS Certificate क्या है?

बीआईएस Certificate भारत सरकार द्वारा गुणवत्ता के हित में प्रमाणित होने वाला एक प्रमाणपत्र है।

सीधे शब्दों में कहें तो हमारे देश की सरकार ने देश के बाहर से आयात होने वाले कई खराब सामानों को रोकने के लिए वस्तु का भारतीय मानक तय करती है।
और सरकार का कहना है कि भारत में आने वाली किसी भी आयात वस्तु को यह भारतीय मानक प्रमाणपत्र (BIS Certificate) पास करना होगा और जब वह वस्तु भारतीय मानक के सभी मानदंडों को पूरा करेगी, तभी वह वस्तु भारत में आएगी और मार्केट में बेची जाएगी।

निष्कर्ष

हमें उम्मीद है कि आपको आर्टिकल में बताये गए टॉपिक्स जैसे की , बीआईएस क्या होता है, बीआईएस शब्द का पूर्ण नाम (BIS Full Form in Hindi ) बीआईएस के प्रमुख कार्य है, और किसी भी धातु पर बीआईएस सर्टिफिकेट और बीआईएस मार्क क्यों जरूरी है इसके बारे में सही जानकारी मिली होगी । इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि अन्य लोग भी इसके बारे में जानकारी हासिल कर सके और इस आर्टिकल और ब्लॉग से सम्बंधित किसी तरह के फीडबैक के लिए कमेंट करें।

siya

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