प्रत्येक कंप्यूटर, मोबाइल फोन, होम ऑटोमेशन कॉम्पोनेन्ट , IoT सेंसर और इंटरनेट से जुड़े किसी भी डिवाइस को अन्य डिवाइस आपस में कनेक्ट करने और कम्युनिकेशन करने के लिए एक आईपी एड्रेस की आवश्यकता होती है। इंटरनेट प्रोटोकॉल मुख्य रूप से दो प्रकार (IPv4 और IPv6 ) के होते है। अभी तक आपने IPv4 के बारे में विस्तार से जाना होगा , आज के इस आर्टिकल में हम आपको IPv6 Address in Hindi ? के बारे में विस्तार से बताने है।
IPv6 एड्रेस क्या है ? What IPv6 Address in Hindi ?
आज के समय में इंटरनेट और विभिन्न प्रकार की नेटवर्किंग के लिए IPv4 का व्यापक रूप में उपयोग हो रहा है , लेकिन बढ़ती हुई नेटवर्किंग की डिमांड से ऐसा अनुमान लगाया गया की आने वाले समय में IPv4 में IP की कमी हो सकती है। इसी समस्या को हल करने के लिए इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स (IETF) द्वारा 1998 में IPv6 को डेवलप किया गया। IPv6 128-बिट अल्फ़ान्यूमेरिक इंटरनेट प्रोटोकॉल का वर्शन 6 प्रोटोकॉल है जिसमे पहले के IPv4 की तुलना में बहुत एडवांस फीचर और अधिक IP की संख्या देखी जा सकती है, IPv4 की तुलना में IPv6 128 बिट होने से इसका एड्रेस लोकेशन काफी बढ़ जाता है।
IPv6 एड्रेस के प्रकार | Types Of IPv6 Address In Hindi
IPv6 एड्रेस के विभिन्न प्रकार और फॉर्मेट हो सकते है , जिसका उपयोग विभिन्न नेटवर्क मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की IPv6 में ब्रॉडकास्ट एड्रेस का उपयोग नहीं किया जाता है।

- Global unicast. यह एक यूनिक एड्रेस होता है जिसका उपयोग इंडिविजुअल नेटवर्क इंटरफ़ेस को असाइन करने के लिए किया जाता है। यूनिक एड्रेस IPv4 के पब्लिक IP एड्रेस के सामान होते है
- Multicast Addresses: मल्टी कास्ट एड्रेस किसी एक को डाटा सेंड न करके ग्रुप में डाटा सेंड करने का कार्य करता है।
- IPv6 Loopback Address: लूपबैक एड्रेस IPv4 (127.0.0.1) के सामान्य एक एड्रेस होता है ,IPv6 का लूपबैक एड्रेस ::1 होता है।
- IPv6 Unspecified Address: यह IPv4 के अन-स्पेसिफ़िएड एड्रेस (0.0.0.0) के सामान्य होता है ,IPv6 का अन-स्पेसिफ़िएड :: होता है
- IPv6 Special Addresses: IPv6 में इस प्रकार के एड्रेस का उपयोग विशेष उदेश्य के लिए उपयोग किया जाता है जैसे की नेटवर्क डिस्कवरी (ff02::1) , स्टेटलेस एड्रेस ऑटोकॉन्फ़िगरेशन आदि।
- Unique Local : ये IPv4 के प्राइवेट एड्रेस के सामान होते है । इनका उपयोग प्राइवेट नेटवर्क में किया जाता है और इन्हे इंटरनेट के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। इस तरह के एड्रेस में FD00::/8 प्रीफिक्स होता है।
IPv6 एड्रेस का फॉर्मेट Format Of IPv6
पहले की तुलना में IPv6 128 बिट का है जिसे सही से मैनेज करने के लिए 8 ग्रुप में बाँटा गया है जिसके प्रत्येक ग्रुप में 16 bit होते है। प्रत्येक ग्रुप को चार हेक्साडेसिमल डिजिट में व्यवस्थित किया गया है और प्रत्येक ग्रुप को कोलन द्वारा अलग किया जाता है।
उदाहरण के लिए नीचे IPv6 के उदाहरण को देख सकते है।

IPv6 एड्रेस को नेटवर्क और नोड या इंटरफ़ेस दो पार्ट में बांटा जाता है। Network Prefix के पहले 64 बिट का उपयोग राउटिंग में किया जाता है और दूसरे 64 बिट का उपयोग Interface के एड्रेस की पहचान करने के लिए किया जाता है। नेटवर्क नोड को 48 और 16 बिट के सेक्शन में और भी डीवाइड किया जा सकता है। जिसमे की पहले 48-बिट सेक्शन का उपयोग नेटवर्क एड्रेस के लिए किया जाता है और नीचे के 16-बिट सेक्शन का उपयोग नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा कण्ट्रोल करने के लिए किया जाता है और इंटरनल नेटवर्क में Subnet के लिए उपयोग किया जाता है।
IPv6 के लाभ | Advantages Of IPv6
- IPv6 में पहले के IPv4 वर्शन की तुलना में असीमित आईपी एड्रेस है इसका मतलब यह है कि हमारे पास IP एड्रेस खत्म नहीं होंगी जैसा की हमने IPv4 में महसूस किया था।
- IPv6 में इनबिल्ड सिक्योरिटी फ़ीचर जैसे की IPsec (Internet Protocol Security)जो इंटरनेट ट्रैफ़िक के लिए डेटा इंटीग्रिटी, ऑथेंटिकेशन और एन्क्रिप्शन जैसे फीचर प्रदान करता है। इसकी मदद से इंटरनेट कनेक्शन को पहले की तुलना में अधिक सिक्योर किया जा सकता है।
- IPv6 हाइअरार्किकल एड्रेसिंग स्ट्रक्चर की सुविधा देता है जो रूटिंग की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
- IPv6 में IP एड्रेस सेटअप के लिए इनबिल्ड ऑटो कॉन्फ़िगरेशन फ़ीचर दिया गया है जिससे डिवाइसों को नेटवर्क में स्वंय को कॉन्फ़िगर करना आसान हो जाता है। यह डिवाइस में एड्रेस असाइनमेंट, नेटवर्क सेटअप और एडमिनिस्ट्रेटर को आसान बनाने के लिए DHCP पर निर्भरता रहता है।
- IPv6 की हेडर स्ट्रक्चर को सरल बनाया गया है। IPv4 के काम्प्लेक्स हेडर स्ट्रक्चर की तुलना में इसे बहुत आसान बनाया गया है। जिससे राउटर और अन्य डिवाइस द्वारा पैकेट प्रोसेसिंग फ़ास्ट तरीके हो सकती है।
- IPv6 में अधिक IP एड्रेस होने से इसमें NAT (Network Address Translation) को हटा दिया गया है अब डिवाइस के पास यूनिक IP एड्रेस हो सकते है।
- IPv6 में मल्टीकास्ट फीचर को इंटेग्रेट किया गया है जिससे वन टू मैनी या मैनी तो वन कम्युनिकेशन किया जा सकता है। इसकी मदद से IPv6 में मल्टीकास्ट को डिप्लॉय करना आसान हो जाता है।
IPv6 के नुकसान | Disadvantages Of IPv6 Address In Hindi
- हालांकि IPv6 को IPv4 के कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन अभी भी कुछ मशीन , सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन IPv6 के साथ कम्पेटिबल नहीं है।
- किसी संस्थान या कंपनी में चल रहे सिस्टम या सर्वर को IPv4 से IPv6 में कन्वर्ट करना एक काम्प्लेक्स और ख़र्चीला टास्क हो सकता है। इसके लिए हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में अपग्रेड की आवश्यकता हो सकती है।
- IPv6 में इनबिल्ड IPsec का फ़ीचर दिया है , यदि इसे सही तरीक़े से कॉन्फ़िगर और मैनेज न किया जाए तो नेटवर्क सिक्योरिटी के लिए रिस्क हो सकता है।
- IPv6 को मैनेज करना और अड्रेस को समझ कर असाइन करना के चुनौती भरा टास्क हो सकता है इसलिए इसे मैनेज और कॉन्फ़िगर करने के लिए एक्सपर्ट और सही नॉलेज की आवश्यकता होती है।
- IPv6 में नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेशन (NAT) का फीचर हटा दिया गया है जो IPv4 में प्राइवेट एड्रेस को सिक्योर करने में मदद करता था। IPv6 एड्रेस में NAT का फीचर न होने से इंटरनल डिवाइस को इंटरनेट से डायरेक्ट कनेक्ट होना पड़ेगा जो एक तरह का रिस्क होगा ।
- नेटवर्क में लेटेस्ट IPv6 को इम्प्लीमेंट करने के लिए नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर और इंजीनियर को इसे अच्छे से समझने की आवश्यकता होगी जिससे इंस्टिट्यूट का समय और रिसोर्स अधिक खर्च होगा
- IPv6 एड्रेस का हेक्साडेसिमल नोटेशन कुछ यूज़र्स के लिए कंफ्यूज करने वाला हो सकता है विशेष रूप से जिन्हे IPv4 के कुछ कांसेप्ट समझ आते है।
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