You are currently viewing सेटेलाइट क्या है कितने प्रकार के होते है और कैसे  कार्य करते है
satellite in hindi

सेटेलाइट क्या है कितने प्रकार के होते है और कैसे कार्य करते है

4.7/5 - (72 votes)

आपने अक्‍सर टीवी और न्यूज़ पेपर पर इसरो (ISRO) और नासा (NASA) के द्वारा आकाश में सेटेलाइट को रॉकेट के माध्‍यम से छोड़ते हुए देखा ,पढ़ा और सुना होगा। , जिनको तैयार करने से लेकर आकाश में छोड़ने में करोड़ों रूपए खर्च होने की खबरें भी आपने सुनी होगीं। लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि ये सेटेलाइट आकाश में जाकर क्‍या करते हैं। इनका हमारे जीवन में क्‍या उपयोग होता है। साथ ही आकाश की इतनी ऊंचाई में जाकर भी ये कभी नीचे क्‍यों नहीं गिरते। आइए आज हम अपनी इस पोस्‍ट में आपको सेटेलाइट के बारे में बताने वाले है । इसमें हम जानेगें कि सेटेलाइट क्‍या होता है (What is satellite in Hindi) और सेटेलाइट किस तरह से आकाश में काम करता है , सेटेलाइट का आकर कितना होता है , सेटेलाइट उपर जाकर कार्य कैसे करता है इत्यादि ।

सेटेलाइट क्या होता है | What is satellite in Hindi

सेटेलाइट एक तरह का उपग्रह होता है जो कि पृथ्‍वी के चारों तरफ चक्‍कर लगाता रहता है। सेटेलाइट को वैज्ञानिक द्वारा अंतरिक्ष में होने वाली अनेक प्रकार की गतिविधियों, मौसम की जानकरी , आकाशीय पिंडो की जानकारी , सुरक्षा , नेविगेशन इत्यादि को समझने के लिए लॉन्च किया । जाता है

सेटेलाइट पृथ्वी से बहुत दूर होते है इसलिए हम इसे अपनी खुली आखो से नहीं देख सकते है इसका मतलब है की इसको देखने के लिए हमें किसी उपकरण या टेक्नोलॉजी का सहारा लेना पड़ेगा जैसे की टेलिस्कोप इत्यादि।

सेटेलाइट पृथ्‍वी से बहुत ऊपर होते हैं और पृथ्‍वी के चारों तरफ चक्‍कर लगाते रहते हैं। अगर हम सेटेलाइट के आकार की बात करे तो इनका आकार इस बात पर निर्भर करता है कि सेटेलाइट किस उद्देश्य के लिए भेजा गया है। इनका आकार एक टीवी से लेकर एक ट्रक के बराबर बड़ा भी हो सकता है।

सेटेलाइट को आकाश में एक बार छोड़ दिया गया जो उसे फिर पृथ्‍वी परवापस दोबारा नहीं लाया जा सकता है। इसलिए इन्हें वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए इस तरह से बनाया जाता है कि ये कम से कम 15 से 20 साल या उससे भी अधिक समय तक आकाश में अपना काम अच्‍छे तरीके से करते रहें।

सेटेलाइट आकाश में कैसे काम करता है |How satellite Work in Hindi

satellites बादलों, महासागरों, भूमि और बर्फ के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। वे वातावरण में गैसों को भी मापते हैं, जैसे ओजोन और कार्बन डाइऑक्साइड, और पृथ्वी द्वारा अवशोषित और उत्सर्जित ऊर्जा की मात्रा। और satellites जंगल की आग, ज्वालामुखियों और उनके धुएं की निगरानी भी करते हैं।

satellites के प्राप्त जानकारी के अनुसार ही वैज्ञानिकों को मौसम और जलवायु की भविष्यवाणी करने में मदद मिलती है।

अंतरिक्ष की ओर मुख करने वाले उपग्रहों में विभिन्न प्रकार के कार्य होते हैं। कुछ सूरज से आने वाली खतरनाक किरणों पर नजर रखते हैं। अन्य क्षुद्रग्रह और धूमकेतु, सितारों के इतिहास और ग्रहों की उत्पत्ति का पता लगाते हैं। कुछ उपग्रह अन्य ग्रहों के निकट या परिक्रमा करते हैं। ये अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह पर पानी के प्रमाण की तलाश कर सकते हैं या शनि के नज़दीकी तस्वीरें खींच सकते हैं।

यदि हम सेटेलाइट के कार्य की बात करे तो वैज्ञानिक इन्हे आकाश में लांच करने से पहले इनमे कैमरा , ट्रांसमीटर और रिसीवर फिट करते है। सेटेलाइट कैमरे के माध्यम से पृथ्वी और आकाश में होने वाली गतिविधियों की पिक्चर लेने का कार्य करता है , सेटेलाइट में लगा रिसीवर वैज्ञानिको द्वारा भेजे जाने वाले मैसेज , कमांड इत्यादि को प्राप्त करने का कार्य करता है और उसी के अनुसार कार्य करता है और सेटेलाइट में लगा ट्रांसमीटर गतिविधियों की पिक्चर और मैसेज को वैज्ञानिको तक पहुंचाने का कार्य करता है।

सभी सेटेलाइट में कुछ पंखे और मोटर लगे रहते हैं जो कि इसे दिशा देने का काम करते हैं। यदि कभी ये सेटेलाइट अपनी दिशा से इधर उधर भटक जाते है ऐसी खबर अपने अक्सर टीवी न्यूज़ और न्यूज़ पेपर में सुनते होंगे तो रिसर्च सेण्टर में बैठे वैज्ञानिक इसी मोटर और पंखो की सहायता से इसे फिर से अपने सही डायरेक्शन में लाने का कार्य करते है और सेटेलाइट अपनी धुरी पर पुनः आकर पृथ्‍वी के चक्‍कर लगाने लगता है।

सेटेलाइट कितने प्रकार के होते हैं? Types Of satellite in Hindi

सामान्‍य तौर पर सेटेलाइट का विभाजन तीन भागों में किया गया है। ये विभाजन इनकी दूरी को देखते हुए किया गया है। जिनमें लो, मी‍डियम और हाई अर्थ ऑर्बिट शामिल है।

लो अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट (Low Earth orbit satellite)

‘लो अर्थ ऑर्बिट’ सेटेलाइट उन सेटेलाइटों को कहा जाता है, जो कि पृथ्‍वी की कक्षा के सबसे करीब होते हैं। इनकी ऊंचाई सामान्‍यत: 400 से लेकर 2000 किलोमीटर तक रखी जाती है। इस तरह की सेटेलाइट को भेजने का फायदा यही रहता है कि इसको भेजने में रॉकेट का ईंधन कम खर्च होता है। साथ ही इस तरह के सेटेलाइट से पृथ्‍वी से दूरी कम होने के चलते वैज्ञानिकों को इससे संपर्क जोड़ना भी काफी आसान रहता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये रहता है कि इन्‍हें भेजने के दौरान जोखिम बहुत कम रहता है।

मी‍डियम अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट (Medium Earth orbit satellite)

मी‍डियम अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट उन्‍हें कहा जाता है जो कि आकाश में 20 हजार किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई पर रहते हैं। इनका ज्‍यादातर प्रयोग नेविगेशन में ही किया जाता है। साथ ही ये लो अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट से कम गति से घूमने के चलते पृथ्‍वी का पूरा एक चक्‍कर लगाने में 12 घंटे का समय लेते हैं।  

हाई अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट (High Earth orbit satellite)

इस तरह के सेटेलाइट पृथ्‍वी की कक्षा से सबसे ज्यादा दूरी पर स्‍थित रहते हैं। इनकी ऊंचाई 35 से लेकर 36 हजार किलोमीटर के बीच रहती है। यदि हम इनकी घूर्णन गति की बात करें तो ये सेटेलाइट पृथ्‍वी के साथ ही घूमने का काम करते हैं। किसी भी अंतरिक्ष केंद्र के लिए इन सेटेलाइटों को सुरक्षित अपनी कक्षा में स्‍थापित करना एक चुनौती की तरह होता है।

मानव निर्मित उपग्रह के नाम

मानव द्वारा निर्मित उपग्रह के नाम की लिस्ट को देखने के लिए यहाँ क्लिक करे

सेटेलाइट का हमारे जीवन में क्या उपयोग होता है?

सेटेलाइट से चलने वाली चीजों का प्रयोग आज हमारी दैनिक दिनचर्या में बहुत आम बात हो गई है। इससे हमारा फोन, टीवी, इंटरनेट, जीपीएस, और गूगल मैप जैसी चीजें चलती हैं। जबकि देश के स्तर पर हवाई जहाजों को रास्‍ता बताने का काम, पुलिस का वायरलेस फोन चलाने में सेटेलाइट अपनी अहम भूमिका निभाता है। इसके साथ ही सेना को पड़ोसी देशों पर नजर रखने में और मौसम के बारे में जानकारी हासिल करने में भी सेटेलाइट बेहद मददगार सिद्ध होता है।

उपग्रह पर परीक्षाओं अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:-

इस समय आकाश में कितने उपग्रह मौजूद हैं?

1 जनवरी, 2021 तक लगभग 6,542 उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें से 3,372 उपग्रह सक्रिय हैं, और 3,170 उपग्रह निष्क्रिय हैं। क्‍योंकि अंतरिक्ष में लगातार कोई ना कोई देश सेटेलाइट भेजता ही रहता है। इसलिए इसकी कोई निश्‍चित संख्‍या नहीं रहती है, लेकिन हम

क्या हम उपग्रह देख सकते हैं?

हां, आप उपग्रहों को विशेष कक्षाओं में देख सकते हैं क्योंकि वे रात में ऊपर से गुजरते हैं। शहर की रोशनी से दूर और बादल रहित आसमान में देखना सबसे अच्छा है। उपग्रह कुछ मिनटों के लिए आकाश में लगातार घूमते हुए एक तारे की तरह दिखते है । कभी कभी आप समझ नहीं सकते की आप जिसे आकाश में देख रहे है वो सेटेलाइट था या फिर विमान था। आप टेलेस्कोप के माध्यम से इसे अच्छी तरह देख सकते है।

सेटेलाइट अंतरिक्ष में कितने समय तक चल सकता है?

कोई भी सेटेलाइट कम से कम 15 से 20 सालों तक जरूर आकाश में काम करता है। लेकिन जरूरी सेवाओं से जुड़े सेटेलाइट कई दशकों तक भी काम करते रहते हैं। क्‍योंकि इन्‍हें बार बार नहीं भेजा जा सकता।

भारत का पहला सेटेलाइट कौन सा था

आर्यभट भारत का पहला सेटेलाइट है इस सेटेलाइट का नाम भारत के पहले खगोलशास्त्री के नाम पर रखा गया था। इसे सोवियत संघ द्वारा 19 अप्रैल 1975 को कॉसमॉस-3एम प्रक्षेपण वाहन द्वारा कास्पुतिन यार से प्रक्षेपित किया गया था।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने जाना की सेटेलाइट क्या होते है (satellite in Hindi) , इसका आकार क्या होता है और यह कैसे कार्य करते है। इस आर्टिकल को पड़ने के बाद उम्मीद करते है की आपको सेटेलाइट से सम्बन्धी अच्छी जानकारी मिली होगी। इस आर्टिकल (satellite in Hindi) से सम्बंधित किसी तरह के फीडबैक के लिए हमें कमेंट करें और हमारे अन्य ब्लॉग siyaservice.com के आर्टिकल को भी पढ़े और अपना फीडबैक दें।

इसे भी पढ़े : साइबर क्राइम क्या होते है इससे कैसे बचा जा सकता है।

siya

नमस्कार ! मै Simi Kaithal इस वेबसाइट का Owner और Founder हु। हम इस वेबसाइट में एक प्रोफेशनल ब्लॉगर की तरह कार्य करते है , जहा पर रीडर को Technical Blogging , web Development ,SEO, Software , GK एवं अन्‍य जानकारी दी जाती है । इस वेबसाइट का पूर्ण मकसद अधिक से अधिक लोगो को फ्री में जानकारी देना है। किसी भी प्रकार के सवाल या डाउट जिसका अभी तक हल न मिला हो बेझिझक हमसे पूछ सकते है ।

Leave a Reply