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वृंदावन का प्रेम मंदिर ताज महल से भी अधिक सुन्दर है जाने इसका रहस्य

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इस आर्टिकल का टाइटल देख कर आप समझ गए होंगे की यहाँ पर हम आपको प्रेम मंदिर वृन्दावन (prem mandir vrindavan) के बारे में चर्चा करने वाले है। भगवान श्री कृष्ण की पावन धरती में स्थित प्रेम मंदिर अपनी भव्यता और खूबसूरती के लिए देश भर में प्रसिद्ध है।वृंदावन का यह अद्भुत मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा जिले में स्थित है। यह प्रेम मंदिर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।

यह मंदिर राधाकृष्ण और सीताराम को समर्पित है। इस मंदिर की भव्यता और इसकी सुंदर नक्काशी को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यात्रा करके आते हैं। शाम के समय जब आरती होती है तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमर उठती है। कहा जाता है कि वृंदावन में हीं भगवान श्री कृष्ण ने अपना पूरा बचपन बिताया था। भगवान श्री कृष्ण का जन्म भी इसी स्थान पर हुआ था इसी स्थान से कुछ दूर बरसाना नामक एक छोटा सा शहर है जहां पर श्री कृष्ण की  प्रेमी राधा रानी रहा करती थी। वृंदावन में स्थित प्रेम मंदिर भगवान श्री कृष्ण के प्रेम की छवि को उजागर करता है।

prem mandir vrindavan
Source Image : mathura.nic.in

prem mandir vrindavan को किसने स्थापित किया था

भगवान श्री कृष्ण और राधा को समर्पित प्रेम मंदिर वृंदावन का निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा करवाया गया है। इस मंदिर का शिलान्यास 14 जनवरी 2001 को किया गया था और 17 फरवरी 2012 को यह मंदिर पूर्ण रूप से बनकर तैयार हुआ। यह मंदिर वृंदावन में स्थित अन्य मंदिरों में सबसे अनोखा और ख़ूबसूरत मंदिर है। यह मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनर्जागरण का नमूना है। प्रेम मंदिर की वास्तुकला भगवान श्री कृष्ण के दिव्य प्रेम को साकार करता हैं।

प्रेम मंदिर की वास्तुकला और वातावरण

प्रेम मंदिर की सरंचना की कुल ऊंचाई 125 फुट, लम्बाई 122 फुट और चौड़ाई 115 फुट है। प्रेम मंदिर को इटालियन करारा संगमरमर इस्तेमाल करके बनाया गया है और इसके सफेद संगमरमर की दीवारों पर बारीकी नक्काशी भी किया गया है। संगमरमर की शिलाओं पर राधा गोविंद गीत भी सरल भाषा में लिखे गए हैं। प्रेम मंदिर के पहली मंजिल में भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के आकर्षक मूर्तियां स्थापित है वहीं दूसरी मंजिल में भगवान राम और सीता को समर्पित प्रतिमाएं स्थापित है।

इस मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर 8 मोरों के नक्काशी दार तोरण लगे हुए हैं वंही मंदिर की बाहरी दीवारों पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के लीलाओं को उजागर किया गया है।

prem mandir vrindavan
Source image : navbharattimes.indiatimes.com

प्रेम मंदिर में सजीव प्रतीत होती हुई भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कनिष्ठ उंगली पर उठाई गई गोवर्धन पर्वत की एक झांकी भी बनाई गई है। प्रेम मंदिर में राधा कृष्ण की मनोहर झांकियां, भगवान श्री कृष्ण की गोवर्धन लीला, झूलन लीला की झांकियां और कालिया नाग दमन लीला उद्यानों के बीच सजाई गई है। इस मंदिर के गर्भ ग्रह की दीवार 8 फीट मोटी है, जिस पर एक विशाल शिखर, एक स्वर्ण कलश और एक ध्वज रखा गया है।

गर्भ ग्रह के बाह्य और आंतरिक भाग में प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प की श्रेष्ठ पच्चीकारी और नक्काशी की गई है। मन्दिर में कुल 94 स्तम्भ हैं और प्रत्येक स्तंभ पर राधा और कृष्ण की विभिन्न लीलाओं को उंकेरा गया है। इन पर किंकिरी और मंजरी सखियों के विग्रह भी दर्शाए गए हैं ।

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प्रेम मंदिर वृंदावन के रोचक तथ्य

  • प्रेम मंदिर वृंदावन 54 एकड़ में फैला हुआ है इस मंदिर का निर्माण राजस्थानी सोमनाथ गुजराती स्थापत्य शैली में किया गया है।
  • मंदिर के निर्माण में लगभग 150 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
  • इस मंदिर के निर्माण में कुल 11 वर्ष का समय लगा है।
  • प्रेम मंदिर को कुल 1000 शिल्प कारों ने मिलकर तैयार किया है।
  • प्रेम मंदिर के अंदर प्रवेश करना पूरी तरह से निशुल्क है।
  • प्रेम मंदिर का मुख्य आकर्षण रात के समय में होता है क्योकि रात के समय में रंग बिरंगी लाइटिंग फाउंटेन शो का आयोजन किया जाता है जिसमें भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं की झांकियों को संगीतमय धुन पर प्रदर्शित किया जाता है।
  • इस मंदिर के एक परिधि मार्ग में 48 फलक है जो राधा कृष्ण के अतीत को दर्शाते हैं।
  • मंदिर के बाहरी हिस्से में भगवान श्री कृष्ण के प्रेम पूर्ण अतित को प्रदर्शित करते हुए 84 पैनल भी लगाए गए हैं।
  • प्रेम मंदिर के दीवारों और फर्श को रंगीन अर्ध कीमती पत्थरों से ढका गया है जिसमें फूलों और कलियों के साथ लताओं को दर्शाया गया है।
  • मंदिर के दरवाजे और खिड़कियां पर भी अलंकृत रूप से नक्काशी की गई हैं।
  • प्रेम मंदिर के पूरे भाग में सुंदर लाइट लगाए गए हैं जिसकी रोशनी से मंदिर हर 5 मिनट में रंग बदलते रहती है।
  • प्रेम मंदिर के अंदर भगवान श्री कृष्ण की लीला और उनके चमत्कार के चित्र भी लगाए गए हैं।
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Source image : hindi.news18.com

प्रेम मंदिर मथुरा में मनाए जाने वाले उत्सव

प्रेम मंदिर वृंदावन (prem mandir vrindavan )मथुरा में हर साल जन्माष्टमी और राधा अष्टमी त्योहार को बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस मौके पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में पर्यटक यहां के उत्सव में भाग लेने के लिए आते हैं। हालांकि इन दोनों परिवारों के अतिरिक्त यहां की होली भी बहुत ही शानदार होती है। इसीलिए फरवरी और मार्च के बीच भी यहां पर श्रद्धालुओं की काफी ज्यादा भीड़ उमड़ती है।

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प्रेम मंदिर मथुरा कैसे जाएँ?

यदि आप भी कृष्ण , राधा और उनकी नाटकथाओ को पास जाकर महसूस करना चाहते है तो उसके लिए आपको प्रेम मंदिर वृन्दावन (prem mandir vrindavan) जाना चाहिए । प्रेम मंदिर मथुरा पहुंचने के लिए आप हवाई, सड़क और ट्रेन तीनों में से किसी भी मार्ग का चयन कर सकते हैं।

हवाई जहाज से वृन्दावन कैसे जाये

हवाई मार्ग के जरिए प्रेम मंदिर वृंदावन (prem mandir vrindavan)पहुंचने के लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा खेरिया हवाई अड्डा है जिसे आगरा हवाई अड्डा के नाम से भी जाना जाता है यह हवाई अड्डा वृन्दावन से 70 से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी, बस या अन्य ऑटो रिक्शा उपलब्ध हो जाता है।

ट्रैन से वृन्दावन कैसे जाये

रेलवे मार्ग के जरिए प्रेम मंदिर वृन्दावन (prem mandir vrindavan)तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा रेल जंक्शन है जो मंदिर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप देश के किसी भी शहर में रहते होंगे ट्रैन से मथुरा रेल जंक्शन आसानी से पहुंच सकते है।

सड़क यातायात से वृन्दावन कैसे जाये

प्रेम मंदिर वृंदावन जाने के लिए आप देश की किसी भी शहर से मथुरा के लिए राज्य परिवहन बसें भी चलती हैं या फिर अपने निजी वाहन के जरिए भी आप वृंदावन जा सकते। वैसे सड़क परिवहन वृन्दावन जाने का सबसे अच्छा तरीका है इससे आप प्रेम मंदिर वृन्दावन (prem mandir vrindavan) के आलावा आप मथुरा और आस पास के अन्य तीर्थ स्थल भी देख सकते है।

प्रेम मंदिर में दर्शन का सही समय क्या हो सकता है

वैसे प्रेम मंदिर सुबह सुबह 5:30 बजे से रात के 8:30 बजे तक खुला रहता है। लेकिन मंदिर के दर्शन , आरती और कुछ ख़ास कार्यक्रम , आदि के लिए कुछ समय निश्चित किए गए हैं।

prem mandir vrindavan
  • सुबह 5:30 बजे से 6:30 बजे तक के बीच दर्शनार्थी मंदिर में आ सकते हैं इस दौरान मंदिर में आरती और परिक्रमा होती है।
  • 6:30 सूबह से लेकर 8:30 के बीच मंदिर का द्वार भोग के लिए बंद हो जाता है ‌।
  • उसके बाद 8:30 बजे से लेकर दोपहर के 12:00 बजे तक दर्शन करने के लिए मंदिर के द्वार को दोबारा खोला जाता है और फिर 12:00 बजे से लेकर शाम के 4:30 बजे तक मंदिर का द्वार बंद रहता है।
  • शाम के 4:30 बजे से लेकर 5:30 बजे के बीच आरती और दर्शन करने के लिए मंदिर के द्वार खुले रहते हैं।
  • फिर शाम 5:30 से लेकर 8:00 के बीच में भोग लगाने के लिए द्वार को बंद कर दिया जाता है ।
  • शाम 8:00 से लेकर 8:30 के बीच शयन आरती और दर्शन होते हैं और फिर मंदिर का द्वार बंद कर दिया जाता है।

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siya

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