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कुतुब मीनार कहाँ है ? कुतुबमीनार का निर्माण, इतिहास वास्तुकला। .. पूरी जानकारी

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इस आर्टिकल में हम आपको भारत की सबसे ऊंची ,प्राचीन , विश्व धरोहर कुबुबमीनार के बारे में बताएँगे जैसे की कुतुबमीनार कहा है (kutub minar kahan hai) , इसका इतिहास , वास्तुशिल्प , आसपास घूमने लायक जगह और कैसे पंहुचा जाये।

भारत के प्रत्येक अधिकतर राज्यो में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं जो हमारी संस्कृत , गौरव और इतिहास को बयां करती है। इन इमारतों को देखने के बाद भारत के प्राचीन वास्तु कला और विभिन्न शासकों के बारे में पता चलता है। ऐसी ही एक ऐतिहासिक इमारत भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है जिसका नाम कुतुबमीनार है।

कुतुब मीनार भारत के उन तमाम ऐतिहासिक इमारतों में से एक है जिसकी नींव दिल्ली सल्तनत काल में रखी गई थी। कुतुबमीनार को देखने के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं और कुतुब मीनार की सुंदरता और उसके वास्तुशिल्प का दीदार करते हैं। तो चलिए इस लेख के माध्यम से भारत की सबसे ऊंची मीनार क़ुतुब मीनार के इतिहास , इसके वास्तुशिल्प के बारे में जानते हैं।

कुतुबमीनार क्या है?

कुतुबमीनार भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है जो भारत का सबसे ऊंची मीनार कहलाती है। कुतुबमीनार यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में से एक मानी जाती है जिसे 1993 में इसके ऐतिहासिक महत्व स्थापत्य प्रतिभा के लिए इसे विश्व धरोहर की सूची में रखा गया था।

कहा जाता है कुतुब मीनार के वास्तु शिल्प से ही प्रेरित होकर पश्चिमी दिल्ली के हातसाल गांव में स्थित मिनी कुतुब मीनार और दौलताबाद में स्थित चांद मीनार को स्थापित किया गया था। यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में आती है। हर साल यहां पर लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ नवंबर से दिसंबर के महीने में होती है।

क्योंकि इस दौरान कुतुब मीनार में कुतुब महोत्सव करके एक वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिसमें 3 दिनों तक संगीतकार , नृत्यकार और कलाकार यहां के माहौल को मनमोहक बना देते हैं।

kutub minar kahan hai

कुतुब मीनार का निर्माण किसने करवाया?

इतिहासकारो के अनुसार कुतुब मीनार के निर्माण में तीन शासकों का योगदान है। कुतुब मीनार के आधार की नींव दिल्ली सल्तनत काल के दौरान गुलाम वंश के संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक ने रखा था। लेकिन कुतुबुद्दीन ऐबक को इस इमारत को पूरा करने से पहले मृत्यु हो गयी , जिसके बाद उसके उत्तराधिकारी और उसके दामाद इल्तुतमिश ने 1200 ईसवी में इस मीनार के निर्माण के कार्यों को पूरा करवाया।

इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार के तीन मंजिलें का निर्माण करवाया था। उसके बाद कई बार भूकंप के कारण कुतुब मीनार का विनाश हुआ है। लेकिन उस समय के शासको ने उसका पुनः निर्माण किया। शुरुआत में भूकंप के कारण जब कुतुब मीनार की ऊपरी 2 मंजिला पूरी तरीके से ध्वस्त हो गयी थी तब उस समय के शासक फिरोज शाह ने क़ुतुब मीनार को पुनः निर्मित किया और 2 नए मंजिलों का निर्माण करवाया इस तरह कुतुबमीनार 5 मंजिलों वाला एक विशाल काय इमारत दिखती है ।

उसके बाद 1505 ईसवी में दोबारा भूकंप आने के कारण इसका कुछ भाग ध्वस्त हो गया लेकिन पुनः इस मीनार का निर्माण सिकंदर लोदी के द्वारा किया गया । आगे 1974 में मीनार के नष्ट भाग को दोबारा मेजर स्मित के द्वारा निर्मित किया गया था। इस तरीके से प्राकृतिक आपदाओं के कारण कुतुब मीनार के नष्ट हुए भाग को समय-समय पर कई शासकों के द्वारा पुनः निर्माण कराया जाता है।

कुतुबमीनार का वास्तुशिल्प

  • कुतुब मीनार भारत इतिहास का सबसे बेहतरीन स्थापत्य कला में से एक है जो गोलाकार आधार पर खड़ा 5 मंजिले का भारत का सबसे ऊंचा मीनार है।
  • कुतुब मीनार की कुल ऊंचाई 240 फीट है वहीं इसकी कुल चौड़ाई 14.3 फीट है।
  • कुतुबमीनार को बनाने के लिए लाल बलुआ पत्थर और मार्बल का इस्तेमाल किया गया है । इसके पहले तीन मंजिले को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है । वंही चौथी और पांचवी मंजिल को मार्बल और बलुए पत्थर के प्रयोग से बनाया गया है।
  • कुतुब मीनार के पत्थरों पर फूल बैलों की महीन नक्काशी की गई है इसके साथ ही कुरान की आयतें भी लिखी हुई है।
  • कुतुबमीनार को एक बहुत बड़े परिसर में बनाया गया है जिसके आसपास अन्य कई सारी ऐतिहासिक और प्राचीन स्मारक मौजूद है।
  • कुतुब मीनार के अंदर शीर्ष तक पहुंचने के लिए 379 सीढिया भी लगी हुई है जिसे वर्तमान में बंद कर दिया गया है।
  • कुतुब मीनार के प्रत्येक मंजिलें पर सुगमता और शालीनता से बनाया गया घेरा है जो देखने में बिल्कुल मधुमक्खी के छत्ते जैसा लगता है।
  • कुतुब मीनार के प्रत्येक मंजिल पर गोलाकार बालकनी निर्मित है जिस पर जटिल वास्तुकला किया गया है।
  • कहा जाता है कुतुब मीनार का निर्माण अफगानिस्तान में स्थित जाम की मीनार से प्रेरित होकर किया गया है। इसका निर्माण अफगानिस्तान शैली में किया गया है।

कुतुब मीनार के आसपास घूमने लायक जगह।

अभी तक आपने जाना की कुतुबमीनार कहा है और इसकी वास्तुकला का भी वर्णन किया (kutub minar kahan hai) . यदि आप कुतुबमीनार देखने जाते है तो इस भव्य इमारत के आलावा इसके आस पास और क्या देख सकते है।

इमाम जामिन का मकबरा

कुतुब मीनार परिसर में स्थित प्राचीन स्मारकों में से एक इमाम जामिन मकबरा है। इसका निर्माण सौलवीं शताब्दी में सूफी संत मोहम्मद अली के द्वारा किया गया था। इस मकबरे का निर्माण लोधी वास्तु शैली में करवाया गया है जिसके निर्माण में संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।

इमाम जामिन का मकबरा

लोहा स्तंभ

कुतुब मीनार के परिसर में देखने लायक प्राचीन स्थलों में से एक लोह स्तंभ है जिसे कीर्ति स्तंभ के नाम से भी जाना जाता है। यह स्तंभ 7.2 मीटर ऊंचा है जिसका निर्माण चौथी शताब्दी में गुप्त वंश के शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के द्वारा किया गया था। लौह स्तंभ भगवान विष्णु के ध्वज के रूप में समर्पित है जिसके ऊपरी भाग पर हिंदू देवता गरुड़ का चित्र अंकित है। इसकी सबसे रोचक बात यह है कि यह 98% लोहे से बना हुआ है लेकिन उसके बावजूद आज तक इसमें जंग नहीं लगा है।

लोहा स्तंभ
Source Image : Facebook

इल्तुतमिश का मकबरा

कुतुब मीनार के परिसर में एक और प्राचीन स्मारक इल्तुतमिश का मकबरा उत्तरी पूर्वी हिस्से में मौजूद है जिसका निर्माण 1235 ईस्वी में शमसुद्दीन इल्तुतमिश के द्वारा किया गया था । वह गुलाम वंश का दूसरा शासक था जिसने कुतुबुद्दीन के द्वारा नींव डाली गई कुतुबमीनार को पूरा करवाया था। इल्तुतमिश का मकबरा खूबसूरत संरचना और बेजोड़ वास्तुकला के कारण यहां आने वाले पर्यटको को मंत्रमुग्ध करता है।

इल्तुतमिश का मकबरा

अलाइ मीनार

कुतुब मीनार परिसर में अलाई मीनार भी देखने लायक स्थलों में से एक है। हालांकि यह एक अधूरी संरचना है जिसका निर्माण अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा किया गया था। वह कुतुब मीनार से भी ज्यादा ऊंचा मीनार बनाना चाहता था लेकिन 1316 में उसकी मृत्यु हो जाने के कारण इस इमारत को पूरा नहीं किया जा सका जिसके कारण 24.5 मीटर तक ही इसका निर्माण हो पाया। लेकिन इसके अधूरी सरंचना भी यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद होती हैं।

अलाइ मीनार

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद

कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद कुतुब मीनार परिसर के भीतर इल्तुतमिश मकबरे और अधूरे स्मारक अलाई मीनार के बीच में स्थित है। इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर के इस्तेमाल से किया था। कहा जाता है कि यह मस्जिद दिल्ली सहित भारत की सबसे पहली निर्मित मस्जिद है जो वर्तमान में खंडहर स्वरूप में है।

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद
Source Image Flickr

कुतुब मीनार कैसे पहुंचे

इतना कुछ जानने के बाद आपके मन में सवाल आ रहा होगा की कुतुबमीनार कहा है (kutub minar kahan hai ) . तो इसका जवाब है कुतुबमीनार भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है जो भारत का एक मेट्रोपॉलिटन महानगरीय राज्य है। कुतुबमीनार तक पहुंचने के लिए रेलवे , हवाई और सड़क तीनों मार्गो की अच्छी सुविधा है।

वायु मार्ग से : कुतुबमीनार घूमने आने के लिए यदि आप वायु मार्ग का चयन करना चाहते हैं तो यहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो घरेलू उड़ान के साथ ही अंतरराष्ट्रीय उड़ान की भी सुविधा देता है । यह हवाई अड्डा भारत के तमाम शहरों जैसे कि लखनऊ , गोवा , जयपुर , अहमदाबाद , चेन्नई, बंगलुरु, कोलकाता आदि हवाई अड्डे से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग से : कुतुब मीनार घूमने आने के लिए रेल मार्ग भी सबसे सस्ता और अच्छा माध्यम हो सकता है। यहां का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन है जो भारत के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरीके से कनेक्टेड है ।

रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे से कुतुबमीनार तक पहुंचने के बाद यहां पर सिटी लोकल ट्रांसपोर्ट सेवाएं भी उपलब्ध है। इसके साथ ही इसके निकटतम ग्रीन लाइन पर हौज खास और ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन भी मौजूद है जिसके जरिए आसानी से कुतुबमीनार तक पहुंचा जा सकता हैं।

सड़क मार्ग से : इसके अतिरिक्त दिल्ली भारत के कई राज्य उत्तर प्रदेश , पंजाब , हरियाणा, उत्तराखंड जैसे राज्यों के यह शहर सड़क नेटवर्क के साथ जुड़ा हुआ है जिससे खुद के निजी वाहन या बस के जरिए भी कुतुबमीनार घूमने के लिए आ सकते हैं।

FAQs कुतुबमीनार से सम्बंधित पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न कुतुबमीनार की उचाई कितनी है
उत्तर : कुतुबमीनार की उचाई 75. 5 मीटर 240 फीट से अधिक है।

प्रश्न: कुतुबमीनार कितने मंजिला और कितनी सीडिया है है
उत्तर : कुतुबमीनार 5 मंजिला ईमारत है और कुल सीढ़ियों की संख्या 379 है

प्रश्न: दुनिया की सबसे ऊंची मीनार कौन सी है
उत्तर : दुनिया की सबसे ऊंची मीनार की बात करे तो उसका नाम कुतुबमीनार है

प्रश्न: Kutub Minar Kahan Hai
उत्तर : कुतुबमीनार दक्षिण नयी दिल्ली से लगभग 15 -20 KM दूर महरौली में स्थित है।

प्रश्न: कुतुबमीनार का निर्माण कब और किसने कार्य
उत्तर : कुतुबमीनार का निर्माण 1199 से 1220 तक माना जाता है और का निर्माण कुतुब-उद-दीन ऐबक और उसके उत्तराधिकारियों ने कराया था।

इस आर्टिकल में हम आपको भारत की सबसे ऊंची ,प्राचीन , विश्व धरोहर कुबुबमीनार के बारे में बताया जैसे की कुतुबमीनार कहा है (kutub minar kahan hai) , इसका इतिहास , वास्तुशिल्प , आसपास घूमने लायक जगह और कैसे पंहुचा जाये।

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