master boot record in hindi: जब भी हम कंप्यूटर या लैपटॉप को स्टार्ट करते है तो कंप्यूटर में इनस्टॉल ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows, Linux आदि) को लोड करने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है , इस प्रक्रिया के कम्पलीट होने के बाद ही हमें कंप्यूटर में काम करने की सुविधा मिलती है। कंप्यूटर को सही से स्टार्ट करने में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है Master Boot Record यानी MBR का होता है।
MBR एक छोटा प्रोग्राम होता है लेकिन कंप्यूटर हार्ड डिस्क या स्टोरेज डिवाइस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो यह तय करता है कि कंप्यूटर कहां से बूट होगा। MBR को सबसे पहले 1983 में IBM PC के लिए उपयोग किया गया था और तब से लेकर आज तक यह कंप्यूटर की दुनिया में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
आज के इस आर्टिकल में हम जानेगे की कंप्यूटर में उपयोग होने वाला Master Boot Record (MBR) क्या है , किसकी संरचना, उपयोग, कार्य विशेषताएं आदि।
मास्टर बूट रिकॉर्ड (MBR) क्या है? (What Is master boot record in hindi)
मास्टर बूट रिकॉर्ड (MBR) कंप्यूटर की हार्ड डिस्क या अन्य स्टोरेज डिवाइस के पहले हिस्से (फर्स्ट ट्रैक के फर्स्ट सेक्टर )में मौजूद एक खास प्रकार की इनफार्मेशन होती है। जब किसी कंप्यूटर हार्ड डिस्क को ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल करने के लिए पहली बार फॉर्मेट या पार्टीशन बनाया जाता है तो MBR पार्टीशन आटोमेटिक बन जाता है ।
MBR डिस्क के पहले सेक्टर (sector 0) में होता है और इसका मुख्य काम कंप्यूटर को सही तरीके से स्टार्ट (बूट) करना होता है। एमबीआर में मुख्य तीन भाग होते हैं: bootloader, जो ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करने में मदद करता है; partition table, जो डिस्क को अलग-अलग हिस्सों (partitions) में कैसे बाँटा गया है , यह बताने का कार्य करता है और एक magic number, जो यह जांचता है कि MBR सही है या नहीं। MBR अधिकतम 4 प्राइमरी पार्टिशन को सपोर्ट करता है और 2 टेराबाइट (TB) तक की डिस्क साइज़ को हैंडल सकता है।
अगर MBR खराब हो जाए या करप्ट हो जाए, तो कंप्यूटर बूट नहीं कर सकता । पुराने कंप्यूटरों में MBR का ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन आजकल के नए सिस्टम में GPT (GUID Partition Table) का प्रयोग होता है, जो MBR की तुलना में अधिक एडवांस और सिक्योर है। सरल शब्दों में, MBR कंप्यूटर को यह बताता है कि उसे कहाँ से शुरू करना है और हार्ड डिस्क में ऑपरेटिंग सिस्टम कहाँ स्थित है।
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मास्टर बूट रिकॉर्ड के मुख्य कॉम्पोनेन्ट (Components of MBR)
MBR यानी मास्टर बूट रिकॉर्ड का साइज 512 Byte का होता है जिसे मुख्य रूप से तीन पार्ट्स में बांटा गया हैं। जो कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम को सही तरीके से बूट करने और पार्टीशन डाटा को एक्सेस करने में मदद करते है।

- बूटलोडर (Bootloader): यह छोटा प्रोग्राम होता है जिसका साइज 446 Byte होता है। इसका मुख्य कार्य कंप्यूटर से कनेक्ट हार्ड डिस्क में ऑपरेटिंग सिस्टम को सर्च करना और उसे स्टार्ट करने में मदद करना।
- पार्टिशन टेबल (Partition Table): MBR में इसका साइज 64 Byte का होता है. इसका मुख्य कार्य कंप्यूटर से कनेक्ट हार्ड डिस्क में क्रिएट किये गए Partition की इनफार्मेशन को स्टोर करना होता है। पार्टीशन टेबल से आपको पता चलेगा की हार्ड डिस्क में कितने पार्टीशन है और इनका साइज क्या है।
- मैजिक नंबर (Magic Number): यह एक छोटा कोड होता जिसका साइज दो बाइट्स ( 0x55 और 0xAA )का होता है जो चेक करता है कि MBR सही है या नहीं। अगर यह कोड सही नहीं मिला, तो कंप्यूटर बूट नहीं कर पाता।
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एमबीआर कैसे कार्य करता है? (Working master boot record in hindi)
जब आप अपना कंप्यूटर या लैपटॉप चालू करते हैं, तो सबसे पहले कंप्यूटर की हार्ड डिस्क का पहला हिस्सा यानी मास्टर बूट रिकॉर्ड (MBR) स्टार्ट होता है। MBR हार्ड डिस्क के सबसे पहले सेक्टर (sector 0) में स्टोर होता है। इसका मुख्य काम कंप्यूटर को यह बताना होता है कि ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows या Linux) किस पार्टीशन में है और कहाँ से शुरू करना है।
जब कंप्यूटर पावर ऑन होता है, तो BIOS या UEFI सबसे पहले MBR को रीड करता है। MBR में एक छोटा बूटलोडर प्रोग्राम होता है जो ऑपरेटिंग सिस्टम को शुरू करने की प्रोसेस को कण्ट्रोल करता है। यह बूटलोडर ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य फाइल्स को सर्च करता है और उन्हें कंप्यूटर की मेमोरी में लोड करता है ताकि ऑपरेटिंग सिस्टम सही ढंग से शुरू हो सके।
इसके अलावा, MBR की पार्टिशन टेबल डिस्क को चार प्राइमरी पार्टिशन में बाँटती है और हर पार्टिशन की जानकारी देती है। यह कंप्यूटर को बताता है हार्ड डिस्क में कितने पार्टीशन है और उनका लोकेशन क्या है । अगर MBR सही तरीके से काम करे, तो कंप्यूटर बिना किसी प्रॉब्लम के बूट हो जाता है। लेकिन अगर MBR खराब हो जाए या करप्ट हो जाए, तो कंप्यूटर बूट नहीं कर सकत और मॉनिटर में एरर शो करेगा । इसलिए MBR कंप्यूटर के बूट प्रोसेस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

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मास्टर बूट रिकॉर्ड की विशेषताएं (Features of MBR)
- MBR हार्ड डिस्क के सबसे पहले सेक्टर में स्थित होता है।
- इसमें बूटलोडर होता है जो ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करता है।
- MBR में पार्टिशन टेबल होती है जो अधिकतम 4 प्राइमरी पार्टिशन को सपोर्ट करती है।
- यह डिस्क को 2 टेराबाइट (TB) तक संभाल सकता है।
- MBR की साइज 512 बाइट होती है।
- इसमें 2 बाइट का मैजिक नंबर होता है जो MBR की वैधता जांचता है।
- MBR पुराने कंप्यूटर और BIOS सिस्टम के साथ कंपैटिबल है।
- इसका इस्तेमाल डिस्क को बूट करने और पार्टिशन मैनेजमेंट के लिए किया जाता है।
- MBR का डाटा आसानी से करप्ट हो सकता है, इसलिए इसका बैकअप जरूरी होता है।
- यह GUID Partition Table (GPT) की तुलना में सीमित पार्टिशन और डिस्क साइज सपोर्ट करता है।
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मास्टर बूट रिकॉर्ड क्यों महत्वपूर्ण है? (Why Is MBR Important?)
MBR यानी मास्टर बूट रिकॉर्ड कंप्यूटर के लिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि यही हार्ड डिस्क के सबसे पहले हिस्से में होता है और कंप्यूटर को बताता है कि ऑपरेटिंग सिस्टम कहाँ से शुरू करना है। बिना MBR के कंप्यूटर को पता नहीं चलता कि कंप्यूटर से कनेक्ट हार्ड डिस्क में कितने पार्टीशन है और ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क के किस पार्टीशन में है।
MBR से कंप्यूटर को ऑपरेटिंग सिस्टम सर्च करने और उसे स्टार्ट करने में मदद मिलती है । इसलिए MBR कंप्यूटर की बूटिंग प्रोसेस का सबसे पहला और महत्वपूर्ण पार्ट होता है। अगर MBR खराब हो जाए, तो कंप्यूटर बूट पार्टीशन, ऑपरेटिंग सिस्टम आदि सर्च नहीं कर पायेगा और मॉनिटर में एरर मैसेज शो कर देगा और आपको डाटा एक्सेस करने में प्रॉब्लम हो सकती है । इसलिए MBR का सही होना और उसकी सिक्योरिटी बहुत जरूरी है।
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एमबीआर की सीमाएं (Limitations of master boot record in hindi)
MBR यानी मास्टर बूट रिकॉर्ड कंप्यूटर की बूटिंग और पार्टिशन मैनेजमेंट के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन इसके कुछ लिमिटेशन भी हैं जो मॉर्डन टेक्नोलॉजी की जरूरतों को पूरा नहीं कर पातीं। नीचे MBR की मुख्य लिमिटेशन दी गई हैं:
- MBR केवल 2 टेराबाइट (TB) तक की डिस्क साइज को सपोर्ट करता है.
- इसमें अधिकतम केवल 4 प्राइमरी पार्टिशन ही बनाए जा सकते हैं
- अगर MBR खराब हो जाए, तो पूरा सिस्टम बूट नहीं हो सकता।
GPT (GUID Partition Table) की तुलना में कम सिक्योर और कम विश्वसनीय है। - MBR पुराने BIOS सिस्टम पर आधारित है, इसलिए नए UEFI सिस्टम के लिए उपयुक्त नहीं है।
MBR से जुड़ी सामान्य समस्याएं (MBR Common Problems)
MBR (मास्टर बूट रिकॉर्ड) कंप्यूटर को शुरू करने में मदद करता है, लेकिन कभी-कभी इसमें कुछ समस्याएं आ सकती हैं, जो कंप्यूटर को सही से चलने नहीं देतीं। ये हैं कुछ आम समस्याएं:
- “MBR Missing” एरर: यह तब आता है जब MBR फाइलें डिलीट या करप्ट हो जाती हैं।
- बूट फेल्योर: कंप्यूटर बूट नहीं करता और केवल ब्लैक स्क्रीन दिखाता है।
- Operating System Not Found: इसका कारण MBR करप्शन हो सकता है।
- Virus Attack: कई वायरस MBR को टारगेट करते हैं और बूट प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं।
- “Invalid partition table” एरर: अगर पार्टिशन टेबल में गलती हो जाए तो यह समस्या होती है।
- हार्ड डिस्क की खराबी: हार्ड डिस्क में खराबी होने पर MBR ठीक से काम नहीं करता।
इन समस्याओं से बचाव के लिए समय-समय पर MBR का बैकअप लेना और एंटीवायरस का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। और MBR प्रॉब्लम को सोल्वे करने के लिए Windows Installation Media का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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MBR और GPT में अंतर (Difference Between MBR and GPT)
| बिंदु | MBR | GPT |
|---|---|---|
| पूरा नाम | Master Boot Record | GUID Partition Table |
| डिस्क साइज सपोर्ट | 2 टेराबाइट (TB) तक | 9.4 ज़ेटाबाइट (बहुत बड़ी डिस्क) तक सपोर्ट |
| पार्टिशन लिमिट | अधिकतम 4 प्राइमरी पार्टिशन | लगभग अनगिनत (आमतौर पर 128) पार्टिशन तक सपोर्ट |
| बूट मोड | BIOS आधारित कंप्यूटर | UEFI आधारित कंप्यूटर |
| पार्टिशन टेबल बैकअप | नहीं होता | GPT में बैकअप कॉपी होती है |
| डेटा सुरक्षा | कम सुरक्षित, करप्ट होने की संभावना अधिक | अधिक सुरक्षित, बैकअप पार्टिशन टेबल होती है |
| कंपैटिबिलिटी | पुराने सिस्टम और हार्डवेयर के लिए उपयुक्त | नए सिस्टम और हार्डवेयर के लिए बेहतर |
| बूट फाइल्स की लोकेशन | बूटलोडर MBR सेक्टर में होता है | बूटलोडर EFI सिस्टम पार्टीशन (ESP) में होता है |
निष्कर्ष (Conclusion)
Master Boot Record (MBR) कंप्यूटर के बूटिंग प्रोसेस का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। MBR तय करता है कि कंप्यूटर कहां से बूट होगा, बल्कि यह डिस्क की संरचना को भी कण्ट्रोल करता है। हालांकि, आधुनिक जरूरतों के हिसाब से इसमें कुछ सीमाएं हैं, जैसे 2TB से बड़ी डिस्क को सपोर्ट न करना और सीमित पार्टिशन सुविधा।
इसलिए आजकल GPT का उपयोग अधिक हो रहा है, लेकिन MBR आज भी पुराने सिस्टम्स में उपयोग किया जाता है। यदि आप किसी कंप्यूटर को मैनेज कर रहे हैं या आईटी क्षेत्र में हैं, तो MBR की फंक्शन्स और लिमिटेशन को समझना आपके लिए बेहद ज़रूरी है। उम्मीद करते है की master boot record in hindi से आपको MBR के बारे में सही जानकारी मिली होगी , किसी तरह के सवाल और डाउट के कमेंट करें।
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