आर्टिकल में हम आपको बताएँगे की Amul full form क्या है , Amul का इतिहास , भारत के मिल्कमैन और अमूल ब्रांड को बनाने वाले डॉक्टर कुरियन का संक्षिप्त परिचय ,इसके प्रमुख प्रोडक्ट और इसका बिज़नेस मॉडल क्या है।
आज के समय में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसने अमूल कंपनी और इसके विभिन्न प्रोडक्ट के बारे में सुना न होगा और आप में से कितने लोगो ने तो इसके अनेको प्रोडक्ट को इस्तेमाल भी किया होगा। क्योकि अमूल भारत का सबसे पॉपुलर और और विश्वशनीय ब्रांड है इसके सभी प्रोडक्ट आपको देश के छोटे और बड़े शहरों में आसानी से मिल जाते है।
अमूल क्या है और इसका पूरा नाम क्या है What is Amul and what is Amul full Form
अमूल जिसका पूरा नाम Anand Milk Union Limited है भारत की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक कंपनी है। अमूल ब्रांड स्थापक या फाउंडर वर्गीज़ कुरियन और त्रिभुवनदास केशीभाई पटेल को जाता है
Amul Full Form – Anand Milk Union Limited
।हालांकि हकीकत यह है कि अमूल का मालिक कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि करीब छब्बीस लाख दुग्ध उत्पादक किसान हैं। अमूल ब्रांड दुग्ध उत्पादन के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही देश के किसानों की दशा दिशा संवारने के लिए भी जाना जाता है। अमूल ब्रांड को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देने की वज़ह से ही डॉक्टर वर्गीज़ कुरियन को भारत का मिल्कमैन भी कहा जाता है।
अमूल ब्रांड का इतिहास : कब क्यों और कैसे स्थापित किया गया..
अमूल ब्रांड की स्थापना आजादी के पहले 14 दिसंबर सन् 1946 को गुजरात के खेरा जिले के छोटे शहर आनंद में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना सहकारी दुग्ध संघ लिमिटेड के तहत की गई थी।
इसमें भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का भी काफी योगदान रहा। इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। वास्तव में अमूल ब्रांड की स्थापना दुग्ध उत्पादन के एक सहकारी आंदोलन के रूप में हुई थी। ताकि दुग्ध उत्पादन में बढ़त के साथ ही देश के किसान आत्मनिर्भर बनें और दुग्ध उत्पादक किसानों का शोषण बंद हो सके ।
अमूल ब्रांड की स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य..
उस समय अंग्रेजी शासन में भारतीय दुग्ध उत्पादक किसानों को उचित कीमत नहीं मिल पाती थी। उस समय बिचौलिये हावी रहते थे। उस वक्त भारतीय दुग्ध बाजार पर एक विदेशी कंपनी पालसन काबिज थी। जिसके दलाल भारतीयों को उनके दुग्ध उत्पादों का उचित मूल्य नहीं अदा करते थे। इसके चलते भारत के दुग्ध उत्पादक किसानों की आर्थिक दशा बिगड़ती जा रही थी।
उक्त समस्या के समाधान के लिए त्रिभुवनदास केशीभाई पटेल किसानों की ओर से सरदार वल्लभ भाई पटेल से मिले जो उस समय भारत के एक प्रभावी नेता हुआ करते थे। इसके बाद श्री त्रिभुवनदास केशीभाई पटेल ने मोरारजी देसाई व सरदार पटेल के दिशानिर्देशों में एक सहकारी दुग्ध संघ की नींव रखी। जो 14 दिसंबर 1946 को गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड के नाम से पंजीकृत की गई।
कुछ समय बाद इसका नेतृत्व भारत के मिल्कमैन कहे जाने वाले डा. वर्गीज़ कुरियन करने लगे और उनके दिशानिर्देशों में यह सहकारी संघ खूब विस्तृत हुआ । उन्होंने ही सबसे पहले भैंस के दूध से मिल्क पाउडर बनाने का फार्मूला ईज़ाद किया। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में यह एक क्रांतिकारी खोज थी।
भारत के मिल्कमैन डा. कुरियन का संक्षिप्त परिचय..
भारत के मिल्कमैन डॉक्टर कुरियन का ताल्लुक़ केरल प्रदेश के कोझिकोड से है। उन्होंने स्नातक स्तर तक केरल में ही अध्ययन करने के बाद बेंगलुरु के इंपीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एनीमल में छात्रवृत्ति यानी स्कालरशिप से पढ़ाई किया । वहां केवल एक वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्गीज़ कुरियन MSC की पढ़ाई करने अमेरिका चले गये।
अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डा. कुरियन ने स्वदेश वापस आकर गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड ज्वाइन कर लिया। हालांकि अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो इस क्षेत्र में कभी नहीं आना चाहते थे। पर आगे उनका ही नेतृत्व पाकर अमूल ब्रांड ने अपने क्षेत्र में नंबर एक की पोज़ीशन हासिल किया ।
देश में दुग्ध उत्पादन के ज़रिये श्वेत क्रांति लाने के लिए भारत के मिल्कमैन डा. वर्गीज़ कुरियन को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया। भारत के मिल्कमैन की उपाधि प्राप्त डा. कुरियन के बारे में एक बेहद दिलचस्प तथ्य यह है कि उन्होंने कभी दूध नहीं पिया।
Amul नाम कैसे पड़ा
अब तक आपने अमूल कंपनी का इतिहास इसके संस्थापक और Amul Full Form के बारे में जाना और अब आपके मन में विचार आ रहा होगा की इसका नाम अमूल नाम कैसे और क्यों पड़ा तो इसकी कहानी बड़ी इंट्रेस्टिंग है। अमूल आज के समय में दूध औरदूध से बनने वाले अन्य प्रोडक्ट के मामले में एक बहुत बड़ा ब्रांड है। अमूल कंपनी का स्वामित्व Kaira District Milk Producers Cooperative Union Ltd के पास है जिसने
1954 में Kaira Milk Union ने बच्चो के लिए मार्केट में एक मिल्क पाउडर लाना चाहते थे। जैसे की आपको पता है की मार्किट में किसी भी प्रोडक्ट को लांच करने उसकी मार्केटिंग करने और सेल करने के लिए एक ब्रांड (नाम ) की आवश्यकता होती है। Kaira Milk Union ने भी मिल्क पाउडर को मार्केट में लाने से पहले एक सही नाम को खोज रहे थे।
और इसके लिए कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों से एक अच्छे नाम का सुझाव माँगा तो उनमे से किसी एक कर्मचारी ने संस्कृत भाषा के ‘अमूल्य’ (AMULYA) नाम को रखने का सुझाव दिया।
यह नाम सही भी था जो Anand Milk Union Limited से मिलता जुलता भी था लेकिन इसमें एक समस्या यह थी की इसमें YA का कोई अर्थ नहीं मिल रहा था तो बाद में कंपनी के प्रबंधक और अन्य उच्च वर्ग की सहमति से AMULYA’ से ‘YA’ लेटर को हटा कर इसका नाम अमूल (Amul ) कर दिया।
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अमूल कंपनी के सीईओ कौन है
9 सितम्बर 2012 को डॉ वर्गिज कुरियन के निधन के पश्चात् आर एस सोढ़ी को अमूल कंपनी का सीईओ बनाया गया है। 30 जून सन 2010 से अब तक (2022 ) आर एस सोढ़ी अमूल कंपनी के CEO पद पर कार्यरत है।
आइये जानते हैं अमूल ब्रांड के साथ जुड़ी कुछ खास और दिलचस्प बातें..
- आज अमूल कंपनी का सालाना टर्नओवर 700 करोड़ रुपये से अधिक है।
- शुरुआत में कंपनी की क्षमता 250 लीटर प्रतिदिन की थी; जबकि आज यह करीब 33 लाख लीटर दूध का रोजाना कलेक्शन कर लेती है।
- दुनिया भर के कुल दुग्ध उत्पादन में अमूल ब्रांड की हिस्सेदारी 1.2 फीसदी है।
- अमूल अपने क्षेत्र का मार्केट लीडर है; जो 85 फीसदी मार्केट शेयर रखता है।
- 2021 -22 में अमूल का सालाना टर्नओवर लगभग 61,000 करोड़ रुपये हो गया है।
- अमूल कंपनी एक सहकारी संस्थान के तौर पर काम करती है; महज़ फ़ायदे के लिए नहीं। इसलिये इसका मुनाफा बहुत अधिक नहीं होता।
अमूल मॉडल क्या हैं? |
अधिकतर कम्पनिया अपने प्रोडक्ट के प्रचार प्रसार और बिक्री के लिए प्रोजेक्ट मॉडल का निर्माण करती है। इसी तरह अमूल ने भी एक प्रोजेक्ट मॉडल बनाया है जिसे आनंद माॅडल के नाम से जाना जाता है। इस मॉडल में कुल तीन संगठन है जिसे आप नीचे समझ सकते है।
1- ग्राम स्तर : अमूल कंपनी अपने प्रोडक्ट को हर छोटे से छोटे गांव तक अपने प्रोडक्ट को सही तरीके से पहुंचाने के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम सहकारी समितीय बनायीं है जिसके द्वारा यह अमूल के प्रत्येक प्रोडक्ट को पहुंचाने का कार्य करती है।
2- जिला स्तर : इस संगठन का मुख्य कार्य होता है जिले में अमूल के उत्पाद की आपूर्ति करना यह समितीय ग्राम स्तर से जुडी होती है
3- राज्य स्तर = राज्य स्तर पर बनी सभी समितीय जिला स्तर से जुडी होती है और इन समितियों का मुख्य कार्य होता है पूरे जिले में अमूल के प्रोडक्ट की सप्लाई करना और निचले स्तर की समितियों को नियंत्रित करना।
अमूल ब्रांड के प्रोडक्ट्स.
त्रिभुवनदास केशीभाई पटेल और डा. कुरियन की लगन से आज अमूल ब्रांड के तमाम प्रोडक्ट्स देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपने स्वाद और शुद्धता के लिए मशहूर हैं। इसके मिल्क पाउडर चीज बटर पनीर और आइसक्रीम जैसे अनेक उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं।
अमूल मिल्क उत्पादन के साथ साथ दूध से बनी हुई अन्य सामग्री का भी उत्पादन करता है जो देश के लोगो द्वारा बहुत पसंद किया जाता है। नीचे आप अमूल के टॉप उत्पाद को देख सकते है।
- Amul Cattle Feed
- Amul Milk
- Amul PRO
- Amul Puffles
- Amul Recipes
- Amul Sour Cream
- Bakery Products
- Beverage Range
- Bread Spreads
- Cheese
- Chocolates
- Dahi
- Fresh Cream
- Ghee
- Happy Treats
- Ice Cream
- Milk Powders
- Mithai Mate
- Mithai Range
- Panchamrit
- Paneer
- Roti Softener आदि
इस आर्टिकल में हमने आपको Amul Full Form से लेकर इसके इतिहास , अमूल नाम की स्थपना और अन्य रोचक तथ्यों से अवगत कराया और उम्मीद करते है इससे आपको बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। आर्टिकल के लिए अपना मूल्यवान फीडबैक दे सकते है जिससे आगे आने वाले आर्टिकल को और बेहतर बनाने में मदद मिले।